श्रेणी: साहित्य

गन्हात, बजबजात पत्रकारिता के आईना देखावत एगो उपन्यास

– अशोक मिश्र आजु समाज के हर क्षत्र में गिरावट आइल बा, आवत जा रहल बा. त भला पत्रकारिता एकरा से बाचल कइसे रह जाईत. पिछला दू दशक में राजनीति आ पत्रकारिता में बहुते तेजी से गिरावट आइल बा. पइसा, चमक दमक, रुतबा आ दलाली के पर्याय...

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जो दिल खोजा आपना…….

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” आजु जी बहुत उदास बा. ए उदासी के कारन हम खुदे बानी. हमरा ई लागत रहल ह की भारत में जवन भ्रस्टाचार व्याप्त बा, अंधकार व्याप्त बा, असांति व्याप्त बा, ओकर कारन खाली नेते अउर अधिकारी बाने. नेता,...

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दास मलूका कह गए सबके दाता राम !

– विकास अजगर करे ना चाकरी पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए सबके दाता राम ! चलीं तनी एह जानल सुनल कहावत के व्याख्या कइल जाव. सोचल जाव कि आखिर अजगर चाकरी काहे ना करे, पंछी काम काहे ना कर सँ आ आखिर राम का लगे देबे खातिर अतना...

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फागुन के आसे

– रामरक्षा मिश्र विमल फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. डर ना लागी बाबा के नवकी बकुली से अङना दमकी बबुनी के नन्हकी टिकुली से कनिया पेन्हि बिअहुती कउआ के उचराई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई....

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अधकपारी – जानकार औरतन खातिर एगो भुक्तभोगी के सुझाव

अधकपारी झेले वाला के एहसे बड़ डर दोसर ना होला कि ओकरा पर फेर अधकपारी के दौरा पड़े वाला बा. काहे कि एकरा साथही आवेला मन हुलियाये, उबकी, घुमरी, आ रोशनी अउर आवाज से जुड़ल कष्ट. अगर रउरा अधकपारी से परेशान बानी त ई किताब रउरा काम के बा....

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