श्रेणी: साहित्य

कभी कभी हमरा दिल में खयाल आवेला.

– अभयकृष्ण त्रिपाठी कभी कभी हमरा दिल में खयाल आवेला. भोजपुरिया बानी हमरा भोजपुरिये भावेला, अंगिका, वज्जिका, मगही मैथिलि सब हमरे नगीना बा, भोजपुरी जइसन मिश्री बोलला में नाही कवनो दाम बा, भोजपुरिया के सफ़र शुरू भी भोजपुरिये...

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ई का हो रहल बा ?

– अशोक मिश्र एक बेर एह सदी के महानायक अमिताभ बच्चन एगो फिल्म में गीत गवले रहले, ये क्या हो रहा है, भाई ये क्या हो रहा है? एकर जवाब मिलल रहे कि, कुछ नहीं…कुछ नहीं… बस प्यार हो रहा है. हम एह फिल्म के देखले नइखी...

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गन्हात, बजबजात पत्रकारिता के आईना देखावत एगो उपन्यास

– अशोक मिश्र आजु समाज के हर क्षत्र में गिरावट आइल बा, आवत जा रहल बा. त भला पत्रकारिता एकरा से बाचल कइसे रह जाईत. पिछला दू दशक में राजनीति आ पत्रकारिता में बहुते तेजी से गिरावट आइल बा. पइसा, चमक दमक, रुतबा आ दलाली के पर्याय...

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जो दिल खोजा आपना…….

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” आजु जी बहुत उदास बा. ए उदासी के कारन हम खुदे बानी. हमरा ई लागत रहल ह की भारत में जवन भ्रस्टाचार व्याप्त बा, अंधकार व्याप्त बा, असांति व्याप्त बा, ओकर कारन खाली नेते अउर अधिकारी बाने. नेता,...

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