कुकुरन के रोटी खियावत रहे के चाहीं – बतंगड़ 106
आ जब हम कहऽतानी कि कुकुरन के रोटी खियावत रहे के चाही त एहमें कुतियनो के शामिल क के कहले बानी। कुकुरन के पूरा प्रजाति के पालन पोषण कइल समाज के जिम्मेदारी होला। काहे कि कुकुर समाज खातिर हमेशा चैतन्य रहेलें। कतहीं तनिको गलत लउकल त भूंकल शुरु कर देलें सँ जेहसे सभे सावधान हो जाय।
समाज खातिर अपना एह समर्पित सुभाव का चलते कुछ कुकुर अइसन हो जालें कि अनासहूं भूंकल शुरु कर देले सँ। एही चलते कहाउत बनल बा कि – आन्हर कुकुर बतासे भूंके। बाकिर कुकुरन के प्रजाति के एगो अउर गुण का चलते सम्मान दिहल जाला। आ ई गुण हवे ओहनी के स्वामिभक्ति! जे एहनी के नियमित रूप से रोटी डालत रहेला ओकरा खातिर ई आपन जानो दे सकेलें सँ। एगो वेबसाइट चलावे का चलते हमहूं कुकुरन के एह प्रजाति में शामिल बानी। अलग बात कि हमरो के रोटी डाले वाला केहू बा ना। रोटी डालल त दूर कई बेर लोग दूरदूरावलो से परहेज करेला। का पता कब कहाँ हबक लेव!
कुकुरे के काम करत कुकुरन पर खासा अनुसंधान कइले बानी। एक बेर के बात हऽ बरीसन पुरान बाकिर एकदम से साँच। बंगाल के इच्छापुर में भइल एगो अखिल भारतीय कुकुर सम्मेलन में शामिल रहे के मौका मिल गइल रहल। का शानदार इतजाम रहुवे। नाश्ता, खाना, शराब सब कुछ के दरियादिली से प्रावधान रहल। नाश्ता कर के कुछ कुकुर ई सोच के परेशान हो जा सँ कि दिन के खाना कवना पेट में खाइल जाई। कुछ कसरत करे लागऽ सँ, कुछ एने ओने दउड़ के आपन पेट में जगहा बनावे के इंतजाम कर ल सँ। साँझ के शराब पार्टी का बाद होश ना रहत रहुवे बाकिर तबहियों कुछ कुकुर परेशान हो जा सँ कि अबहीं रात के खानो खाए के बा।
सम्मेलन का आखिरी दिन बाटा कम्पनी का तरफ से ओकर जूता कारखाना के भ्रमण करे के नेवता रहल। सगरी कुकुर उछाह में रहले सँ कि आखिर अतना बड़ कंपनी बोलवले बिया त उपहारो कुछ बड़हने मिली। एह पर हँसी मजाको के दौर चल जाव। केहू कहे कि सभका के लेदर बैग मिली। केहू कहे कि जूता दीहल जाई त केहू कहे कि चप्पल। फेर केहू सवाल उठा देव कि जूता चप्पल के साइज कइसे तय करी कंपनी। एहसे सभकर एकमत राय रहल कि लेदर के कवनो अइसन उपहार मिली जवन बहुते काम के होखी। कुकुरन के खाली खाइये पी के संतोष ना मिले। ऊ इहो चाहेलें सँ कि ओहनी के दुलारल पुचकारल जाव, कुछ बढ़िया उपहारो मिले। से अगिला दिने जब तीन गो बस में लदा के सगरी कुकुर कारखाना चहुँपलें त बाटा कंपनी का तरफ से एगो बईठक के इंतजाम रहल। प्रबन्धन कंपनी का बारे में जानकारी देत रहलें बाकिर सगरी कुकुर एने ओने ताके झाँके में परेशान रहलें कि उपहरवा सब केने रखाइल बा! लउके त कुछ थाह लागो कि का मिले वाला बा।
आखिर में जब उपहार बँटाइल त ओहमें रहल एगो छोटहन डायरी आ अगो बॉल प्वांयट पेन। सगरी कुकुरन के मूड बिगड़ गइल। बाकिर हालात के तकाजा देखत फेंकरे खातिर तब ले इंतजार कइले सँ जबले सभे बस में वापसी ला सवार ना हो गइल। कंपनी का बारे मे जतना खराब राय बनल एह कुकुर सम्मेलन में ओकर पता लाग जाइत कंपनी के त उहो बूझ जाइत कि सगरी खरचा पानी में बह गइल।
रउरो कबो कवनो कुकुर सभा बोलावे के इरादा होखे त एह बात पर धेयान राखब। कुकुर वाला विषय अतना लमहर बा कि एकरा के एकही बतंगड़ में निपटावल ना जा सके। बाकी फेर कबो कवनो अगिला कड़ी में।


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