श्रेणी: साहित्य

बतकुच्चन – ८

पिछला हफ्ता के तिकवत तिवई का बाद आजु सोचत बानी कि अकसर आ अकसरुआ के बाति कर लीं. अब अकसरुआ त उहे नू कहाई जे अकसर होखे. बाकिर अकसर त ओकरो के कहल जाला जवन आये दिन होत रहे, बार बार होत रहे. एगो दोसर अकसर ऊ होला से अपना अपना घर के...

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“श्रीरामकथा” : सामाजिक परिवर्तन के एगो महाकाव्य

“श्रीरामकथा” भोजपुरी में सामाजिक परिवर्तन के एगो प्रबंध काव्य बा.एकर रचयिता डॉ श्रद्धानंद पांडेय भोजपुरी के मूर्द्धन्य साहित्यकार हईं.एह काव्य में भलहीं रामभक्त कवि के भक्तिभावना केंद्र में बाटे बाकिर एकर पृष्ठभूमि...

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"श्रीरामकथा" : सामाजिक परिवर्तन के एगो महाकाव्य

“श्रीरामकथा” भोजपुरी में सामाजिक परिवर्तन के एगो प्रबंध काव्य बा.एकर रचयिता डॉ श्रद्धानंद पांडेय भोजपुरी के मूर्द्धन्य साहित्यकार हईं.एह काव्य में भलहीं रामभक्त कवि के भक्तिभावना केंद्र में बाटे बाकिर एकर पृष्ठभूमि...

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बतकुच्चन – ७

कुछ दिन पहिले एगो साहित्यकार बंधु के फोन आइल रहुवे. उहाँ के जानल चाहत रहीं कि तिवई के मतलब का होला. शब्द के अर्थ ओकरा व्यवहार का तरह बदलत रहेला. अगर अइसनका ना रहीत त आक्सफोर्ड डिक्शनरी हर बेर आपन नया संस्करण ना निकालित. हर कुछ...

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