एन जी ओ
– संतोष कुमार पटेल शब्द्कोश के नया शब्द समाज के स्वस्थ/शिक्षित/परिष्कृत बनावे के साधन/प्रसाधन जे कह ल जवन कह ल बड़ा व्यापक बा ई शब्द जेकर अर्थ भले समझ गइल बिया सरकार बाकिर एकर मरम समुझे खातिर धोवे के पड़ी आंखिन से शरम काहे...
Read More– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” छोट रहनी तS कई बेर केहू-केहू कहि देत रहल कि ए बाबू अवतारी हउअS का? एकदिन रहाइल ना अउरी हम पूरा गाँव-गिराँव, हित-नात सबके बोलवनि अउरी कहनी की रउआँ सभे जानल चाहत बानी न की हम अवतारी हईं की का...
Read More– संतोष कुमार पटेल अब सीता सावित्री लक्ष्मी पार्वती जइसन नाम आउटडेटेड हो रहल बा काहे की अब लोग अपना आंख के पानी अपने धो रहल बा. लाज ओइसही बिलाइल जाता जईसे गरम तावा पर पानी के एगो बूंद रेगिस्तान में घडी भर के वरखा अब आँखिन...
Read More– नूरैन अंसारी आज जवन नया बा ऊ काल्हुवे पुरान हो जाई. ढेर चुप रहबऽ त आपनो अनजान हो जाई. जले एक में चलत बा घर, चलावत रहऽ, पता ना कब केकरा से दूर ईमान हो जाई. मत करऽ गुमान एतना तू अपना कोठी पर, एक दिन निवास तहरो शमसान हो...
Read More– दिवाकर मणि रामलुभाया चाचा, गोड़ लागिले. खुश रहऽ ए गुणगोबर. कहऽ का हाल-चाल बा? आजुकाल्हि त ना देखाई देत बाड़ऽ ना तहरे बारे में कुछु सुनाते बा, अईसन काहे हो? अउर तहरा चेहरा प ई खुशी टपक रहल बा, एकर रज का बाटे? बात-वात कुछो...
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