कबले अइबऽ पिया
– कन्हैया पाण्डेय लरकल लरहिया बाटे, उजरल पलानी कबले अइबऽ पिया छिलबिल अँगना में पानी. असवों के सेंवतल नइखे चुवेले पलनिया भुरकुस नरियवा-छपुवा, ढहऽता मकनिया उपरा प्लास्टिक कइसो तनले हम बानी कबले अइबऽ पिया छिलबिल अँगना में...
Read More– कन्हैया पाण्डेय लरकल लरहिया बाटे, उजरल पलानी कबले अइबऽ पिया छिलबिल अँगना में पानी. असवों के सेंवतल नइखे चुवेले पलनिया भुरकुस नरियवा-छपुवा, ढहऽता मकनिया उपरा प्लास्टिक कइसो तनले हम बानी कबले अइबऽ पिया छिलबिल अँगना में...
Read More– मनोज भावुक दर्द उबल के जब छलकेला गज़ल कहेलें भावुक जी जब-जब जे महसूस करेलें उहे लिखेलें भावुक जी टुकड़ा-टुकड़ा, किस्त-किस्त में जीये-मुयेलें भावुक जी जिनिगी फाटे रोज -रोज आ रोज सियेलें भावुक जी अपना जाने बड़का-बड़का काम...
Read More– रामरक्षा मिश्र विमल लहरे तिरंगा सजि धजि पूरा देशवा में पसरेले अङना दुअरिया अँजोरिया हरियर धरती चंदनिया पियर बीचे गह गह सगरी बधरिया अँजोरिया. असहीं आजाद हिंदुस्तान रहे जुग-जुग सगरी जहान फइलावे के अँजोरिया. आन बान शान...
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