कविता के जरुरत बा
– रवि कुमार गिरी गुरुजी न सार के जरुरत बा न बिचार के जरुरत बा , कविता लिखत बानी कविता के जरुरत बा , सोच होखे समझ होखे एपर केहू ध्यान ना दी , चटक मटक लिखी समाज के कुछ ज्ञान ना दी , पाहिले लोग खोजत बा कुछ खुला कुछ कसाव ,...
Read More– रवि कुमार गिरी गुरुजी न सार के जरुरत बा न बिचार के जरुरत बा , कविता लिखत बानी कविता के जरुरत बा , सोच होखे समझ होखे एपर केहू ध्यान ना दी , चटक मटक लिखी समाज के कुछ ज्ञान ना दी , पाहिले लोग खोजत बा कुछ खुला कुछ कसाव ,...
Read More– गनेश जी “बागी” बाबूजी सिखवले दुःख सहीहs अपार, कबो ना करीहs बबुआ, केकरो प वार, गलती ना करीहऽ अइसन, पिटे पड़े कपार, दुनिया में कुछु ना रही, रह जाई बस प्यार. बहुते आसान होला, दिल के दुखावल, दोसरा के कइला में,...
Read More– अभयकृष्ण त्रिपाठी बढ़िया रहीत दुनिया में अन्हरिये बनल रहीत करिया चेहरा दुनिया से दरकिनार रहीत. याद आवेला जब सारा जग उजियार रहे, सोन चिरईया के नाम जग में बरियार रहे, मुँह में मिश्री आँखिन में आदर भरमार रहे, स्वर्ग से...
Read More– डा॰ जनार्दन राय नीनि आइल निमन ह. जेकरा आँखि से इहां का हटि जाइला ओकर खाइल-पियल, उठल-बइठल, चलल-फिरल, मउज-मस्ती, हंसी-मजाक कुल्हि बिला जाला. अइसन जनाला कि किछु हेरा गइल बा, ओके खोजे में अदीमी रात-दिन एक कइले रहेला. निकहा...
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