अन्हरिये बनल रहीत
– अभयकृष्ण त्रिपाठी बढ़िया रहीत दुनिया में अन्हरिये बनल रहीत करिया चेहरा दुनिया से दरकिनार रहीत. याद आवेला जब सारा जग उजियार रहे, सोन चिरईया के नाम जग में बरियार रहे, मुँह में मिश्री आँखिन में आदर भरमार रहे, स्वर्ग से...
Read More– अभयकृष्ण त्रिपाठी बढ़िया रहीत दुनिया में अन्हरिये बनल रहीत करिया चेहरा दुनिया से दरकिनार रहीत. याद आवेला जब सारा जग उजियार रहे, सोन चिरईया के नाम जग में बरियार रहे, मुँह में मिश्री आँखिन में आदर भरमार रहे, स्वर्ग से...
Read More– डा॰ जनार्दन राय नीनि आइल निमन ह. जेकरा आँखि से इहां का हटि जाइला ओकर खाइल-पियल, उठल-बइठल, चलल-फिरल, मउज-मस्ती, हंसी-मजाक कुल्हि बिला जाला. अइसन जनाला कि किछु हेरा गइल बा, ओके खोजे में अदीमी रात-दिन एक कइले रहेला. निकहा...
Read More– मुफलिस देई दोहाई देश के, ले के हरि के नाम. बनि सदस्य सरकार के, लोग कमाता दाम. लूटे में सब तेज बा, कहाँ देश के ज्ञान नारा लागत बा इहे, भारत देश महान. दीन हीन दोषी बनी, समरथ के ना दोष. सजा मिली कमजोर के, बलशाली निर्दोष....
Read More– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” केतना खुशी के बाति बा कि काल्ह का बंद से महँगाई घटि गइल. हँ भाई! काँहें हँसतानि? घटल नइखे का? खैर हो सकेला रउरा खातिर ना घटल होखे पर एह बंद से हमार महँगाई त घटि गइल, मतलब हमरा त बहुते फायदा...
Read More– डा॰ सुभाष राय ई त सभे जानेला कि सूरुज उग्गी त सबेर होई इहो मालूम बा सबके कि चान राति क उगेला बहुते नीक लागेला फूल फुलाला त महकेला बाकिर ई केहू के ना पता कि महंगाई काहें बढ़ेले खून-पसीना बहा के भी किसान काहें सबकर मुंह...
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