बदलत-समय
डॉ अशोक द्विवेदी सगरी परानीभइल आजु शहरीगँउवाँ का बिचवाँ मेंसून परल बखरी ! घरनी ले पुतवे का छोह में...
Read Moreडॉ. हरेश्वर राय सियासी छेनी से कालिमा तरासल बिया I चांदनी हमरा घर से निकासल बिया II भोर के आँख...
Read More– ऋचा चलऽ, फेरु सपनन के फेंड़ लगाईं जा ! मउरल-दनात अमराई से अलगा सड़की का गुलमुहरन का नीचे...
Read More– आनन्द संधिदूत जब आँगन का बीच में डँड़वार आ खेत का बीच में सड़क निकललि त खेत क बगड़ी आँगन का...
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..