चलs ना फेर से भाई बनल जाओ भाई
– लव कान्त सिंह दरद हिया के छुपा रहल बानी लोर पोंछ के मुस्का रहल बानी. कांट के बगिया में हमके फेंकल केहू बनके फूल ओजा भी फुला रहल बानी. गरहा खोनले रहस कि गिरी ओमे ई उनहीं के गरहा से बचा रहल बानी. चलs ना फेर से भाई बनल जाओ...
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