श्रेणी: कविता

राष्ट्र प्रेम के एगो गीत

मान  बढ़ाईं  जा माटी के    रामरक्षा मिश्र विमल दुअरा अंगना कहिया छिटकी मधुर किरिनिया भोर के कहिया  पन्ना  पलटल जाई  भारत माँ के  लोर के ?   तमिल तेलगू बङला हिन्दी सब  ह  भारत  के  भाषा अपना जगह  सभे  कंचन बा  एको  ना  बाटे ...

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प्रीत के गीत हरदम सुनाइले हम

– लव कान्त सिंह बा अन्हरिया कबो त अंजोरिया कबो जिनगी में घाम बा त बदरिया कबो प्रेम रोकला से रुकी ना दुनिया से अब होला गोर से भी छोट चदरिया कबो उजर धब-धब बा कपड़ा बहुत लोग के दिल के पहचान हो जाला करिया कबो मिले आजा तू बंधन...

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आन्हर घुमची

  जयशंकर प्रसाद द्विवेदी   घेंटा मिमोरत तोड़त – जोड़त आपन –आपन गायन अपने अभिनन्दन समझवनी के बेसुरा सुर बिना साज के संगीत साधना .   झाड़ झंखाड़ से भरल उबड़ खाबड़ बंजर जमीन ओकर करेजा फारत फेरु निकसत कटइली झाड़...

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