राहि केतनो चलीं हम, ओराते न बा
(भोजपुरी ग़ज़ल) – शैलेंद्र असीम तहरी अँखिया में पानी बुझाते न बा पीर केतना सहीं हम, सहाते न बा...
Read More(भोजपुरी ग़ज़ल) – शैलेंद्र असीम तहरी अँखिया में पानी बुझाते न बा पीर केतना सहीं हम, सहाते न बा...
Read Moreमान बढ़ाईं जा माटी के रामरक्षा मिश्र विमल दुअरा अंगना कहिया छिटकी मधुर किरिनिया भोर के कहिया पन्ना पलटल जाई भारत माँ के लोर के ? तमिल तेलगू बङला हिन्दी सब ह भारत के भाषा अपना जगह सभे कंचन बा एको ना बाटे ...
Read More– लव कान्त सिंह बा अन्हरिया कबो त अंजोरिया कबो जिनगी में घाम बा त बदरिया कबो प्रेम रोकला से रुकी ना दुनिया से अब होला गोर से भी छोट चदरिया कबो उजर धब-धब बा कपड़ा बहुत लोग के दिल के पहचान हो जाला करिया कबो मिले आजा तू बंधन...
Read Moreजयशंकर प्रसाद द्विवेदी घेंटा मिमोरत तोड़त – जोड़त आपन –आपन गायन अपने अभिनन्दन समझवनी के बेसुरा सुर बिना साज के संगीत साधना . झाड़ झंखाड़ से भरल उबड़ खाबड़ बंजर जमीन ओकर करेजा फारत फेरु निकसत कटइली झाड़...
Read More– रामरक्षा मिश्र विमल जिम्मेदारी सघन बन में हेभी गाड़ी के रास्ता खुरपी आ लाठी के बल नया संसार स्वतंत्र प्रभार जिम्मेदारी जाबल मुँह भींजल आँखि फर्ज के उपदेश आ निर्देश गोपाल के ठन ठन नपुंसक चिंतन ...
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