Category: कविता

आन्हर कुकुर बतासे भूंके

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी टीभी के परिचरिचा देखs अस लागे, गोंइठा घी सोखे। आन्हर कुकुर बतासे भूंके।। मिलत जुलत सभही गरियावत पगुरी करत सभे भरमावत पुतरी नचावत मुँह बिरावत एहनिन के अब मुँह के रोके। आन्हर कुकुर बतासे भूंके।। छऊँक...

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आईं आपन छान्हि छवाईं

– डा. कुमार नवनीत काठ करेजी भईल समईया पल पल बदलत दाव, बिछिलायीं जनि, धरीं थहा के आपन एकहक पाँव। सभ धवते बा, आप न धाईं सगरी सपना बेंचि न आईं मोल न कवनो मोल बिकाला, जहवाँ रहीं इहे सरियाईं आईं आपन छान्हि छवाईं तेजि महलिया...

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आरा गान

– शिवानन्द मिश्र रामजी के प्यारा ह, कृष्ण के दुलारा ह, बाबा विसवामीतर के आंखी के तारा ह। बोले में खारा ह, तनीकी अवारा ह, गंगाजी के धारा के नीछछ किनारा ह। गौतमदुआरा ह, भोज के भंडारा ह, सोन्ह गमकेला जइसे दही में के बारा ह।...

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ललुआ इंटर पास हो गइल

पिछला 15 मई का दिने पूर्वांचल भोजपुरी महासभा का तरफ से हिन्दी भवन, ग़ाज़ियाबाद में एगो भव्य राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित कइल गइल जवना क सफलता देखा दिहलसि कि भोजपुरी के चाहे वाला पूर्वांचले ना देश के हर कोना में भरल बाड़ें. सुनवइयन...

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आधुनिक नारी

– लाल बिहारी लाल कवन भूल भइल हमसे भारी विधाता दिहल तू अइसन नारी बात-बात पर गाल बजावे कह कछुओं तS आंख देखावे कलजुग के अइसन नारी विधाता दिहल तू…….. गहना किन तS खुस हो जाली सारी किन तS उS बरी सरमाली बुझसS ना कवनो...

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अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

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