बहल गाँव बिलाइल खेती
– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी नइकी शादी छंटल बहुरिया डिस्को झारत भर दुपहरिया भइया फ्रिज में पानी राखस लुग्गा धोवे रोज तिसरिया अब मइया न बलाएँ लेती . बहल गाँव बिलाइल खेती . बइठल दुअरे बब्बा रोवें घरवां दादी बरतन...
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Read More– रामरक्षा मिश्र विमल जिम्मेदारी सघन बन में हेभी गाड़ी के रास्ता खुरपी आ लाठी के बल नया संसार स्वतंत्र प्रभार जिम्मेदारी जाबल मुँह भींजल आँखि फर्ज के उपदेश आ निर्देश गोपाल के ठन ठन नपुंसक चिंतन जिम्मेदारी...
Read More– केशव मोहन पाण्डेय जनम लिहले कन्हैया कि बाजेला बधाईया अँगनवा-दुअरिया नू हो। अरे माई, दुआरा पर नाचेला पँवरिया कि अइले दुखहरिया नू हो।। बिहसे ला सकल जहान कि अइले भगवान कि होई अब बिहान नू हो। अरे माई, हियरा में असरा बा जागल...
Read MorePosted by Editor | Jul 11, 2016 | कविता, पुस्तक चर्चा, समीक्षा, साहित्य |
भोजपुरी साहित्य से हमार पहिलका परिचय जवना रचना से भइल तवन रहल हरीन्द्र हिमकर जी के लिखल खण्डकाव्य...
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