Category: कविता

देवी गीत

– ओमप्रकाश अमृतांशु रुनु-झुनू, झुनू-झुनू झुनके पैजनिया. खनके कंगना . मोरी देवी अइली डुमरी के फुल हो, झुलुअवा लगावऽ अंगनवा ना. शुभ नवरात शुभे-शुभे घरी आइल, चंपा-चमेली फुल केदली फुलाइल, दवाना-मडुआव़ा के संघे खिलखिलाइल ओढउलवा...

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आपन भारत के हाल

– कमल जी मिश्रा अइसन फाटल खेत में लामे लाम दरार जइसे बोले मंच पे नेता दात चियार. बुढवा पीपर गाव के तब कहले घिघिआइ गदहा रसगुला भछे गलफर गइल छिलाइ. चढ़ल शनीचर माथ पे फुटहा भइल मोहाल शासन-भइसा चर गइल आजादी के माल. जरे पलानी...

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धरती के चुनरी रंगाई

– ओमप्रकाश अमृतांशु कि आरे झुरू -झुरू बहेला फगुनवा , सगुनवा लेइके बा आईल. लाल -पियर शोभेल गगनवा , धरती के चुनरी रंगाईल. {1} आमवा से अमरित टपके , चह-चह चहके चिरइयाँ. महुआ सुगंध में मातल, कुकू -कुकू कुकेले कोइलिया . कि आरे...

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🤖 अंजोरिया में ChatGPT के सहयोग

अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

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