श्रेणी: कविता

आपन भारत के हाल

– कमल जी मिश्रा अइसन फाटल खेत में लामे लाम दरार जइसे बोले मंच पे नेता दात चियार. बुढवा पीपर गाव के तब कहले घिघिआइ गदहा रसगुला भछे गलफर गइल छिलाइ. चढ़ल शनीचर माथ पे फुटहा भइल मोहाल शासन-भइसा चर गइल आजादी के माल. जरे पलानी...

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धरती के चुनरी रंगाई

– ओमप्रकाश अमृतांशु कि आरे झुरू -झुरू बहेला फगुनवा , सगुनवा लेइके बा आईल. लाल -पियर शोभेल गगनवा , धरती के चुनरी रंगाईल. {1} आमवा से अमरित टपके , चह-चह चहके चिरइयाँ. महुआ सुगंध में मातल, कुकू -कुकू कुकेले कोइलिया . कि आरे...

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फागुन के उत्पात: भइल गुलाबी गाल

– मनोज भावुक हई ना देखs ए सखी फागुन के उत्पात । दिनवो लागे आजकल पिया-मिलन के रात ॥1॥ अमरइया के गंध आ कोयलिया के तान । दइया रे दइया बुला लेइये लीही जान ॥2॥ ठूठों में फूटे कली, अइसन आइल जोश । अब एह आलम में भला, केकरा होई होश...

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अब त चिरईओ ना बोले

– डा॰ कमलेश राय सबरे भोरे अब त चिरईओ ना बोले. अब त चिरईओ ना बोले सबेर भोरे. सगरो बिछल अस कारी रइनिया सकुचि सकुचि उगे सुरुज किरिनिया फुलवा पँखुरओ ना खोले, सबेरे भोरे अब त चिरईओ ना बोले. उजरि गइल सब महुआबारी, निबियो ना...

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भउजी माने झगरी

– प्रकाश उदय भउजी माने झगरी पानी माने मछरी – ना धइला खतिरा बूड़ि बूड़ि पोखरा नहइला खतिरा. मारे-मारे उपटी भईयो जी के डपटी छोड़इला खतिरा. “बाचा बाटे” कहि के छोड़इला खतिरा. सरदी में हरदी पियाई जबरजस्ती दवइया...

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