अब त चिरईओ ना बोले
– डा॰ कमलेश राय सबरे भोरे अब त चिरईओ ना बोले. अब त चिरईओ ना बोले सबेर भोरे. सगरो बिछल अस कारी रइनिया सकुचि सकुचि उगे सुरुज किरिनिया फुलवा पँखुरओ ना खोले, सबेरे भोरे अब त चिरईओ ना बोले. उजरि गइल सब महुआबारी, निबियो ना...
Read More– डा॰ कमलेश राय सबरे भोरे अब त चिरईओ ना बोले. अब त चिरईओ ना बोले सबेर भोरे. सगरो बिछल अस कारी रइनिया सकुचि सकुचि उगे सुरुज किरिनिया फुलवा पँखुरओ ना खोले, सबेरे भोरे अब त चिरईओ ना बोले. उजरि गइल सब महुआबारी, निबियो ना...
Read More– प्रकाश उदय भउजी माने झगरी पानी माने मछरी – ना धइला खतिरा बूड़ि बूड़ि पोखरा नहइला खतिरा. मारे-मारे उपटी भईयो जी के डपटी छोड़इला खतिरा. “बाचा बाटे” कहि के छोड़इला खतिरा. सरदी में हरदी पियाई जबरजस्ती दवइया...
Read More– अक्षय कुमार पाण्डेय आन्हीं में, पानी में, जरत रहे दिया, हिया माने ना हार, जिया ठाने ना रार – तोंहे गीत कऽ कसम. धीरे धीरे जमल अन्हार कुल्ह पघिल जाई सोन किरिन आके जब धरती से मिल जाई. चढ़ ऊपर, ऊपर चढ़, थाके ना जोर...
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..