फाग गीत २
-डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. डर ना लागी बाबा के नवकी बकुली से अङना दमकी बबुनी के नन्हकी टिकुली से कनिया पेन्हि बिअहुती कउआ के उचराई. बुढ़वो जोबन राग अलापी ली अङड़ाई चशमो के ऊपर भउजी काजर लगवाई बुनिया...
Read More– संतोष कुमार कलजुग के करिखा में कुल्ही करिया गइल बा जात-पात के बीच खेत अरिया धरिया गइल बा...
Read More
Recent Comments