Category: कविता

केशव के दू गो गीत

– केशव मोहन पाण्डेय 1. गीत महुआ मन महँकावे, पपीहा गीत सुनावे, भौंरा रोजो आवे लागल अंगनवा में। कवन टोना कइलू अपना नयनवा से।। पुरुवा गावे लाचारी, चिहुके अमवा के बारी, बेरा बढ़-बढ़ के बोले, मन एने-ओने डोले, सिहरे सगरो सिवनवा...

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बीत गइल शिवरात्रि बाबा..

– अभयकृष्ण त्रिपाठी बीत गइल शिवरात्रि बाबा नाही अइलऽ तू, पडल रह गइल भांग धतूरा नाही खइलऽ तू | का दिल्ली का कलकत्ता का काशी का मथुरा, तोहरा आड़ में खा रहल बा हर केहू भांग धतूरा, जहर के खाके जहर उगीलत नाही देखलऽ तू, बीत गइल...

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हे ! विद्या के भंडारिणी

– ओमप्रकाश अमृतांशु हम बच्चा दिल के सच्चा  आईऽ गइलीं शरण में . हे ! विद्या के भंडारिणी , द नव कृपा कृपालिनी , बुद्धि – सद्बुद्धि कर द हमरो , हे माँ ! वीणावादिनी . तू दानी हे! वरदानी आईऽ गइलीं शरण में . हमहूँ  ज्ञानी...

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"फगुआ के पहरा" पर एक नजर

– मनोकामना सिंह ‘अजय’ आदरणीय डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल जी, सादर प्रणाम. अपने के भेजल “फगुआ के पहरा” सावन में भाई गंगा प्रसाद अरुण के मार्फत मिलल. राउर गजल के ई लाइन हमनी पर बिलकुल ठीक बइठत बा –...

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केशव के गजल – 2

– केशव मोहन पाण्डेय 1. ग़ज़ल एतना नीचे ना गिरऽ कि शरम छोड़ द, हार आ जीत के कुछ भरम छोड़ द. वसूल जिनगी के सबके अलग होखेला, ऊ मुहब्बत छोड़ें, तू हरम छोड़ द. दरिया काग़ज़ के कश्ती से डरबे करी, शर्त, अइसन कुछ आपन करम छोड़ द....

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