श्रेणी: कविता

जिनगी बेकार लागेला

– मनिर आलम हमर जिनगी हमरे अजब लागेला. आंख में लोर के सैलाब लागेला. दुनिया में तोहरा जैसन कोई नइखे. फूल जैसन चेहरा गुलाब लागेला. का जरुरत बा तोहरा पर्दा के. तोहार केश ही नकाब लागेला. काहे तोरदु तोहार कसम के. जबकि हर आंसू...

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दामाद जी

– नूरैन अंसारी नंबर कौनो भी मेहमान के आवेला उनका बाद जी. अतिथि में सबसे श्रेष्ट मानल जालेन दामाद जी. पाहून जब कबो जालेन अपना ससुराल में. घर के सब केहू लग जाला उनका देखभाल में. पकवान बने ला उहे जवन होला सबसे ख़ास. होखे ना...

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उन्हुकर उदासी

– भगवती प्रसाद द्विवेदी हमार नाँव सुनिके बड़ा ललक से आइल रहले ऊ मिले बाकिर भेंटात कहीं कि हो गइले उदास. शहर के हमरा खँड़हरनुमा खपड़पोश घर में नजर ना आइल दूरदर्शनी एंटिना के मायाजाल दूर-दूर ले ना लउकल वी॰सी॰पी॰ के दर्शनीयता...

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देसी ना, हमके विदेशी चाहीं …

– शैलेश मिश्र अगर हम सानिया मिर्ज़ा बानी त देसी ना, हमके विदेशी चाहीं … अरब के संख्या में हिन्दुस्तानी, बियाह करेके पाकिस्तानी चाहीं. अगर हम सोनिया गाँधी बानी त देसी ना, हमके विदेशी चाहीं … भारत-माता के इटालियन...

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चिट्ठी

– डा॰अशोक द्विवेदी हम तोहके कइसे लिखीं? कइसे लिखीं कि बहुते खुश बानी इहाँ हम होके बिलग तोहन लोग से… हर घड़ी छेदत-बीन्हत रहेला इहवों हमके गाँव इयाद परावत रहेला हर घड़ी ओइजा के बेबस छछनत जिन्दगी. कल कहाँ बा बेकल मन के...

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