श्रेणी: सतमेझरा

पत्थर के देश में पत्थर के लोग

– जयन्ती पाण्डे रउआ कहीं चल जाईं, भारत के कवनो कोना में. सब जगहा रउआ पत्थर दिल के लोग भेंटाई. आखिर काहें ना? जेकरा पर जिम्मेदारी बा कि ऊ सबके आदमी बनाई. ओकरो दिमाग में पत्थरे भर गइल बा. हँ, बात मास्टर लोग के कइल जाता. आज...

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भउजी हो!

भउजी हो! का बबुआ? सुनलू हऽ? बहिर थोड़े हईं. कवना बात का बारे में पूछत बानी? सुने में आवत बा कि देश में शौचालय से बेसी मोबाइल हो गइल बा. त एहमें अचरज का बा? एगो शौचालय से कई लोग के काम चल जाला, जबकि एक एक आदमी के दू गो तीन गो...

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बगैर उनका जइसे बे कूड़ा के नाली

– आलोक पुराणिक हाय हाय का चर्चा निकल पड़ल बा कि दिल्ली से आटो वाला हटावल जइहें. दिल्ली के अगर आटो वालन से अलगा कर के देखीं, त दिल्ली बहुतही चिरकुट टाइप के शहर ह. ई शहर कतना चंट आ बदमाश ह, एकर पता दिल्ली आवते लाग जाला, आटो...

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भउजी हो!

भउजी हो! का बबुआ? कइसे कइसे? कहवाँ रहतानी आजुकाल्हु कि देखलो दुलम भइल बा? जानत रहली हँ कि आजु २१ गो तोप के सलामी मिलला बिना ना रही. जानते बाड़ू हमार काम धाम. कबो कबो खाइलो पियल दुलम हो जाले. खैर तू बताव? चिदम्बरम के इस्तीफा पर...

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अमीरी के नया शौक

– जयन्ती पाण्डे वइसे त कलकत्ता शहर के बड़ाबाजार के सेठ अमीरचंद का लगे बहुत दौलत रह, करिया आ सफेद दूनो. कारोबारो कई गो रहे. जायज कम आ नाजायज बेसी. धन रहे त नाँवो रहे चारू ओर. समाज में रुतबा रहे. तबो अमरचंद के बुझाव कि कवनो...

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