कइसन कइसन शरम ए भईया
– जयंती पांडेय केहु के केहु पर पइसा बकाया रहेला त ऊ आंखि लुकवावे ला. केहु कवनो बात से लजाला त केहु कवनो बात से. एह में एगो होला राष्ट्रीय शर्म. इहो राष्ट्रीय शर्म तरह-तरह के होला. कबहीं मोदी जी के गुजरात में दंगा से हो...
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