पढ़े-लिखे वाला पाठक, पठनीयता आ “पाती” – हमार पन्ना
डॉ अशोक द्विवेदी एगो जमाना रहे कि ‘पाती’ (चिट्ठी) शुभ-अशुभ, सुख-दुख का सनेस के सबसे बड़...
Read MorePosted by Editor | दिसम्बर 5, 2019 | पुस्तक चर्चा, भाषा, समीक्षा, साहित्य |
डॉ अशोक द्विवेदी एगो जमाना रहे कि ‘पाती’ (चिट्ठी) शुभ-अशुभ, सुख-दुख का सनेस के सबसे बड़...
Read Moreसाल 2017 में बिना चुनाव जीतले तब के पीएम आ अपना पिता अनिरुध जगनाथ से मारीशस के कमान धरे वाला पीएम...
Read MorePosted by Editor | सितम्बर 10, 2019 | पुस्तक चर्चा, भाषा, साहित्य |
दू दिन पहिले विमल जी के पत्रिका सँझवत के जानकारी आ सामग्री मिलल. एने कई एक महीना से हम थाकल महसूसत...
Read Moreभोजपुरी के संवैधानिक मान्यता दिआवे आ अठवीं अनुसूची में शामिल करावे खातिर “भोजपुरी जन जागरण...
Read Moreजे भोजपुरी में, भोजपुरी खातिर, बिना लोभ-लालच आ मान-प्रतिष्ठा के परवाह कइले बरिसन से चुपचाप रचनात्मक काम कर रहल बा आ कइले जा रहल बा, ओके नजरअन्दाज कइ के, एक-दूसरा के टँगरी खींचे वाला ई कथित भोजपुरी-हित चिंतक मठाधीशे लोग बा। हमरा त चिंता होला कि भोजपुरी के कबो अगर मान्यता मिल गइल आ ओकरा नाँव पर पढ़े-पढ़ावे भा पुरस्कार-सम्मान के इन्तजाम होइयो गइल त ओकरा बाद के स्थिति केतना बिद्रूप आ भयंकर होई? तब त एक दोसरा क कपार फोरे में ना हाथ लउकी, ना ढेला।
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