टैग: भोजपुरी

सब केहुए पीएम बनल चाहऽता

– जयंती पांडेय आजकाल लोग के ना जाने का हो गइल बा. ना केहु के भूखि लागऽता ना पियास, ना गरमी के परवाह ना लू के. जेकता के देखऽ परधानमंत्री बने के चक्कर में लागल बा. घूरहू से ले के रामचेला ले आ लस्टमानंद से ले के लंबोदर पांड़े...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १८

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) सतरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़त रहलीं मीनू का बारे में. कि कइसे ओकरा गवनई का स्टाइल में लोग आपन आपा भुला जाव. अब ओहसे आगा पढ़ीं….. एक बेर त अजबे हो गइल. कुछ...

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भोजपुरी के अनदेखी पर कवि गोष्ठी में चिंता जाहिर भइल

बलिया के तिखमपुर में शंभुनाथ उपाध्याय का घरे भइल विश्व भोजपुरी सम्मेलन के बलिया इकाई का ओर से एगो कवि गोष्ठी भइल जवना में शिवजी पांडे रसराज, त्रिभुवन सिंह प्रीतम, शशि प्रेमदेव, डा॰ अशोक द्विवेदी, डा॰ शत्रुघ्न पांडेय, कन्हैया...

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बइठले बइठल ज्ञानी हो गइले

– जयंती पांडेय दिल्ली में एगो बड़ भयानक घटना घटल. वइसे दिल्ली जगहिए बड़ा भयानक घटना के नतीजा ह. कलकाता के सिपाही विद्रोह के गोड़ से मसल दिहला का बाद ई शहर राजधानी बनल. मुगलो काल में कुछ अइसने भइल रहे आ कौरवो पांडव के जमानो...

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सब गाँव के रस्ता रोटिए क ओर जाला

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद जब कलकाता अइले त दू गो चीज देखि के अचरज में परि गइले. एक त हावड़ा के पुल आ ओहपर चलत लइका लईकी, आदमी मेहरारू, आ दोसरका इहवां के रेक्शा. रेक्शा देखि के सांचहुं लोग के बुद्धि काम ना करि. एह में...

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