Tag: भोजपुरी

भुखाइल पेट के सांच

– जयंती पांडेय छपरा में दुपहरिया के भोजन क के 23 गो लईका मर गइले सन एह बात से दुखी बाबा लस्टमानंद नेताजी से पूछले कि, हे सरकार, अइसन काहे हो ता? लइकन के जियरा त अंखड़ेरे चल गइल. लईका देश के भविष्य होले सन. नेताजी के रासा...

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एक दिन बेटी खातिर तीरथ-व्रत करी लोग

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद के घर के सामने तिवारी जी के घर बा. बाबाजी गाय भैंस पोसले बाड़े आ पोता होला के आस में दूध बेच दे तारे, पोती लोग के दूध ना पियइहें. तिवराइन कहेली कि ‘का जाने कहां से ई लछमी जी लोग दउरल-दउरल चल...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १९

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) अठरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़नी कि कइसे मीनू अपना भतार से झगड़ा क के लोक कवि के लगे रखैल बने चल अइली आ लोक कवि उनुका के ठाँव दिहलें बाकिर रखैल बनावे से मना कर दिहलें....

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पटना के रविन्द्र भवन में बिहार भोजपुरी अकादमी के पैंतीसवा सालगिरह

अतवार का दिने पटना के रविन्द्र भवन में बिहार भोजपुरी अकादमी के पैंतीसवा सालगिरह बहुते धूमधाम से मनावल गइल. एह मौका पर भइल सांस्कृतिक कार्यक्रम में मालिनी अवस्थी, भरत शर्मा व्यास, मनोज तिवारी आ मारीशस से आइल हुसीला देवी रिसॉल के...

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सावधान, कुकुरन में आदमी के गुण आवऽता

– जयंती पांडेय लस्टमानंद से उनकर एगो संहतिया गोपाल जी भेंटइले. लगले कहे, भाई हो, पहिले घर के दरवाजा पर लिखल रहत रहे ‘अतिथि देवो भव:’ लेकिन आज काल्हु घर के गेट पर लिखल रहऽता ‘ कुत्तों से सावधान.’ गोपाल जी ठीके कहले. जान...

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