टैग: भोजपुरी

केकरा फुरसत बा भोजपुरी में भोजपुरी ला काम करे के?

बहुत पहिले एगो चुटकुला पढ़ले रहीं. गाँधी जी मर गए, नेहरू जी मर गए, मेरी भी तबियत खराब चल रही है. पता नहीं इस देश का क्या होगा? आजु काल्हु कुछ अइसने भाव मन में आवत रहत बा. आजु जब ई लिखत बानी त कार्तिक पूर्णिमा के नहान खातिर लोग के...

Read More

भ्रष्टाचार से खुशहाली बढ़ेले

– जयंती पांडेय गुरू लस्टमानंद मार मईल कुर्ता धोती अपना बेग में से निकाल के बिगत रहले साफ करेके. अतने में राम चेला अइले. दंडवत क के पूछले, का हो बाबा कई दिन से ना लउकलऽ? कहां चल गइल रहलऽ? बाबा कहले, दिल्ली गइल रहीं. राम...

Read More

डाक विभाग के नांव बदलल जाउ

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद कलकत्ता अइले. उहां उनकर नाती नोकरी करत रहे. ओकरा बगल में एगो आदमी रहे , बेचारा मजदूर. अपने ओर के. ओकर बाप बाबा के परिचित. बड़ा चिंता में रहे. सुनलस कि बाबा आइल बाड़े त भेंट करे चलि आइल. ओकरा...

Read More

जिए भोजपुरी! बाकिर कइसे?

ई एगो बड़हन सवाल बा. आ एकर जवाब कवनो एक आदमी ना दे सके. एहसे ई सवाल रउरा सभका सोझा राखत बिया अँजोरिया कि एह सवाल के जवाब खोजल जाव. रउरा सभे से निहोरा बा कि आपन राय विस्तार से अँजोरिया के भेजीं, एहिजा छोटहन कमेंट दे के ना. सभकर...

Read More

रैली के सवर चलल बा

– जयंती पांडेय रोज रैली, प्रदर्शन, नारेबाजी से एकदम रीगल रामचेला कहले – बाबा आजुकाल ई नेतवन के का हो गईल बा कि रोज प्रदर्शन रोज बवाल. जेकरा देखऽ उहे झंडा टंगले चिचियात घूमऽता. बाबा लस्टमानंद मुस्किया के कहले,...

Read More

Recent Posts

अंजोरिया पर खोजीं -

आपन टिप्पणी, लेख, कहानी, कविता, विचार भेजे खातिर -

anjoria@rediffmail.com

अगर राउर रचना पहिला बेर आ रहल बा त आपन एगो रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ में जरूर डाल दीं.

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..