टैग: भोजपुरी

चाय के महातम

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद कहले रामचेला से कि गाय आ चाय में का फरक बा. फरक तऽ ना बुझाइल बाकी बुड़बक अस मुंह बा के लगले तिकवे एने ओने. फेर सांस ले के कहले कि हमरा तऽ मालूम नइखे लेकि बतकुच्चन वाला बाबू ओम परकास जी से पूछ...

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संसद में उठल भोजपुरी के बाति

हाल में समापन भइल संसद के शीतकालीन सत्र में बियफे का दिने भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में जल्दी से शामिल करे के माँग उठवलें. आपन बाति कहत घरी शत्रुघ्न सिन्हा हालांकि एह गंभीर माँग के लालू का...

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तरह – तरह के दंगल

– जयंती पांडेय हमरा देश में तरह – तरह के दंगल होला. कहीं लईकन के त कहीं साढ़न के आ कहीं पहलवानन के. लेकिन अबले केहु अनशन के दंगल ना सुनले होखी. लेकिन अपना देश में ई होला. एकर जे पैदाइश के पता लगावे केहु चली तऽ चलत...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १५

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) चउदहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं कि गोपाल पंडित के बेटी के बिआह खातिर लोक कवि रुपिया त दे अइलन बाकिर बिआह ठीक ना हो पावल. सिरिफ पइसा भर से केहु के शादी ब्याह तय...

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आजु काल्हु बेईमान लोग बड़ा परसान बा

– जयंती पांडेय बेचारा बेईमान लोग बड़ा परसान बा रामचेला. ससुरा ईमानदार लोग ऊ लोग के बड़ा परसान करऽ ता. केहु धरना दे ताऽ, केहु प्रदर्शन करऽ ता आ केहु तऽ अनशन पर बईठ जा ताऽ. बईमान लोग परसान हो गईल तऽ एगो मदारी पासवान के...

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