टैग: भोजपुरी

लोक कवि अब गाते नहीं – ११

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) दसवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं सम्मान मिलला बाद अपना गाँवे चहुँपल लोक कवि के एगो पंडित के कहल नचनिया पदनिया के बात कतना खराब लागल रहे. बाकिर चेयरमैन साहब का...

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पहिर ल त शान बढ़ी आ चल गइल त मान घटी

– जयंती पांडेय रामचेला पूछले बाबा लस्टमानंद से कि ई जूता बड़ा अजीब चीज ह. बाबा कहले, हँ एकर लमहर इतिहास बा, अब देखऽ ना कुछ साल पहिले बगदाद में एगो पत्रकार महोदय जार्ज बुश पर जूता तान दिहले. बुश भअई ओह घरी अमरीका के...

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बे जनले नचला पर गोड़ टूटेला

– जयंती पांडेय रामचेला बड़ा उदास रहले. बाबा लस्टमानंद पूछले कि का हो मुँह काहे लटकवले बाड़ऽ ? रामचेला कहले, ई मीडिया वाला भाई लोग केहू तरह जीये ना दी. अब देखऽ ना, ओह दिन राजघाट पर अनशन पर बइठल भाजपाई भाई लोग के उदासी मेटावे...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १०

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) नवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं सावन का बरखा में राधा में मोहन के रसे रसे बरसल. फेर राधा रुपी धाना के बिआह आन गाँवे होखल, मोहन के अपना गवनई का चलते धीरे धीरे नाम...

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भ्रष्ट लोगन के डिमांड

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद आ रामचेला हरान बाड़े ई जान के कि उनहुं के नेताजी के एगो स्विस बैंक एकाउंट बा. ऊ त आजु काल्हु भ्रष्टाचार पर बयान सुन के हरान बाड़े. बयान अइसन गिरऽता जइसे नेतवन के ईमान, इनकर गिरऽता उनकर गिरऽता....

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