इहवां गड़हा आ भ्रष्टाचार के कमी नइखे
– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद अपना मड़ई में शांति से बइठल रहले कि रामचेला आ धमकले. उनुका के देखते बाबा कहले, “हो ई दुपहरिया में केने चलल बाड़ऽ?” रामचेला कहले, “महँगू के धियवा के बिआह बा, चलऽ चार गो गाड़ी...
Read More– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद अपना मड़ई में शांति से बइठल रहले कि रामचेला आ धमकले. उनुका के देखते बाबा कहले, “हो ई दुपहरिया में केने चलल बाड़ऽ?” रामचेला कहले, “महँगू के धियवा के बिआह बा, चलऽ चार गो गाड़ी...
Read More(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) आठवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं कि सम्मानित भइला का बाद जब लोक कवि अपना गाँवे अइलन त उनुकरा स्वागत में लागल औरतन में उनुकर बालसखी राधो रहली. जेकर असल नाम त रहे...
Read Moreपिछला हफ्ता गोबर पथार के बात निकलल रहे त अबकी खर पतवार दिमाग में आ गइल बा. खर पतवार का बारे में सोचते दिमाग में खरखर होखे लागल जइसे कि मूंजियानी से गुजरत घरी आवाज निकलेला. अइसने खरखर से संस्कृत के एगो शब्द बनल रहे खर्पर. खर्पर...
Read Moreअगर रउरा बिहार में रहीले, सिनेमो देखीले, भोजपुरी से लगावो बा त काहे ना आपन राय लिख के सगरी लोग के जनाइले कि कवन फिलिम कइसन बनल बिया ? अँजोरिया के फिल्म अध्याय में फिल्म प्रचारकन के लिखल रपट नियमित रुप से छपत रहेला. ओह लोग के...
Read More– डॉ. कमल किशोर सिंह उत्तर टोला बर तर, बईठल चबुतर पर, धनिया ढील हेरवावत रहे, सुबुकत सब सुनावत रहे – कतना दुःख सुनाईं बहिनी ई ना कभी ओराला, आ धमकेला दोसर झट से जसहीं एगो जाला. भादो में भोला के कसहूँ गोडवा गइल छिलाय....
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