ई कईसन चुनाव – भउजी हो

भउजी हो! वोट डललू ह नू ?
हँ बबुआ। अबकी जाहीं के पड़ल हऽ। तीस बरीस में पहिला बेर ई कर्तव्य निबाहे के पड़ल ह।
ई का कहत बारू भउजी? पहिला बेर वोट डाले गइलू ह?
ना बबुआ पहिला बेर ना, तीस बरीस में पहिला बेर। ना त पहिले त हर चुनाव में वोट डलते रहुईं। बाकिर जब से बँवारा गोल के राज आईल ओकरा बाद से त वोट डाले जाए के जरुरते ना पड़ल कभी।
त तू मानत रहलू का कि, ‘कोउ नृप होई हमै का हानि, चेरि छाड़ ना होईब रानी!’
ना बबुआ। हमरा निकहा मालूम बा कि वोट डालल हर नागरिक के जिम्मेवारी होला। बाकिर ओकरो ले बड़ जिम्मेवारी होला आपन चैन आ जिनिगी बचावल राखल। रउरा त देखलही होखब पिछलका चुनाव। पिछला बेर हम जब वोट डाले गइल रहीं तब पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के शासन रहुवे। वोटो ओकरे के दिहले रहीं बाकिर कांग्रेस अइसन हारल कि आजु ले फेर खड़ा ना हो पावल। ओकरा बाद से जब जब चुनाव आइल तब तब पलटू दा आ के कह जात रहलें कि रउरा निश्चिंत रहीं। राउर वोट हमनिए का डाल देब सँ। बेकार में परेशान भइला के का जरुरत। आ भईयो के समुझा देब कि उहो मत जइहें ना त ..। आ एह ‘ना त..’ का बारे में एहिजा के सगरी लोग जानबे करेला।
जब तीन चुनाव बाद ममता दी आ गइली तब पलटू दा उनुका गोल में शामिल हो गइलन। आ बाद में त उनुका कट मनी के लत पड़ गइल। हर काम में कट मनी देबे के पड़त रहल। पिछलका चुनाव त रउरा भुलाइल ना होखब। जे जे लोग वोट डाले गइल रहल सभका पराए के पड़ल ना त लुकाए के। बाकिर पलटू दा के ईमानदारी माने के पड़ी। जे वोट डाले के जहमत ना उठवलसि ओकरा कवनो परेशानी ना भइल। अबकी त मोदी शाह के जमाना में चुनाव आयोग अतना कड़ाई कइलसि कि पलटू अपनहीं परा गइल बाड़न। हमरो लागल कि अबकी कवनो खतरा नइखे आ वोट डाल अइनी। आ अबकी त राउर भइयो वोट डललन हऽ।
अब रउरे बताईं कि कतना परेशानी उठावे के पड़ल ह सभका। वोटवा त पहिलहूं पड़िये जात रहुवे बिना कुछ कइले, बिना बूथ ले गइले।
देखतारू ना भउजी। वोट पड़ला का बाद से शान्ति बा। कतहीं से कवनो पार पिटाई कटम कूट के खबर नइखे।
हँ बबुआ। बाकिर चार तारीख त चैन से बीत जाव। अबकीओ जे पलटू के गोल गिरोह जीत गइल त जान लीं घर छोड़ के भागहीं के पड़ी। काहे कि अगर जीत गइले सँ त बंगाल में ऊ होखी जवन डायरेक्ट एक्शनो का दिने बंगाल ना देखले रहल।
निफिकिर रहऽ भउजी। ऊ दिन फेरु लवटे वाला नइखे।
हँ बबुआ, काली जी के दया बनल रहो।


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