ऊ दिन कइसे भूलाएम – कल्पना शाह
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पंजाब के लड़की. पिता पायलट हउवें बाकिर ओकरा ऊँचाई से डर लागेला. मेडिकल में जाये के मन रहे बाकिर बीएससी करे के पड़ल. ओकरा बाद डायटिशियन के कोर्स कइली आ एगो अस्पताल में नौकरियो मिल गइल. बाकिर कहल जाला कि आदमी के किस्मत ओकरा के ओहिजा ले के चलिये जाला जहाँ ओकरा जाये के रहेला.

बाति हो ता कल्पना शाह के. जे आजु भोजपुरी सिनेमा में बुकंदी पर चहुंप चुकल बाड़ी. अपना फिल्म में आवे के संजोग का बारे में बतावत कल्पना कहली कि नाचे के शौक रहे से चंडीगढ़ में एगो स्टेज शो में नृत्य कइली. बाद में ऊ परफारमेंस कवनो चैनल पर देखावल गइल त अशोक जैन कहीं से उनकर नम्बर पता कर के उनुका के फोन कइलें आ पुछलें कि एक भोजपुरी फिल्म में काम करोगी ? फिल्म रहे “बड़की माई”. थोड़ हिचकिचाहट का बाद हँ कह दिहली आ जब शूटिंग शुरु भइल त पहिलके शॉट ओके हो गइल.

फिल्म में आवे में घरो वालन के पूरा सहयोग मिलल. फेर त “भईया के साली, जोगी जी धीरे धीरे, प्रधान जी, प्रेम पुजारन, जब केहू दिल में समा जाला, मार देब गोली केहू ना बोली, कसूर, लखैरा, अपने बेगाने, हम हईँ निरहुआ के जीजा, आ निरहुआ अनाड़ी समेत कई गो फिल्म में काम कर चुकल बाड़ी भा करत बाड़ी.

भोजपुरी सिनेमा में अश्लीलता का बारे में कल्पना के कहना बा कि जतना बा ना ओह ले बेसी के शोर बा. सगरी भोजपुरी के बदनाम करे खातिर हो रहल बा. अश्लील सीन भा संवाद कबहियो फिल्म के मुख्य पात्र का बीच ना होखे बलुक ओकरा के एगो अलगे ट्रैक पर राखल जाले. बाकिर ईहो जरुरी नइखे कि वइसनो सीन राखले जाव. दर्शक के बढ़ियो मनोरंजन दिहल जा सकेला.


(स्रोत – संजय भूषण पटियाला)

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