साल: 2011

हम शादीशुदा बालबच्चेदार आदमी हईं

आजु एह पोस्ट का जरिये हम बता दिहल चाहत बानी कि हम शादीशुदा बालबच्चेदार आदमी हई. हमार एगो केहू शुभचिन्तक शायद ई बाति नइखे जानत जवना चलते ऊ हमार फर्जी प्रोफाइल एगो मैट्रिमोनियल साइट पर बना दिहले रहुवे. गनीमत अतने भइल कि ओह साइट से...

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कहाँ गइल उ दिन

– जयंती पांडेय घर के बूढ़ पुरनिया कहेलन कि सब दिन होत न एक समाना. तुलसिओ बाबा एतना बड़ रामचरितमानस लिख के समुझवले बाड़न, “होइहें वही जो राम रचि राखा, को करि तरक बढ़ावहीं शाखा.” सचहूँ, समय बहुते बलवान होला. एकर...

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डा॰ किहाँ जाये से पहिले तइयारी कर लीं

ममता सिंह हालही में दि इण्डियन जर्नल फॉर कम्युनिटी मेडिसिन में एगो लेख पढ़े के मिलल जवना में दवा लिखे के आ डाक्टरी विचार विमर्श का बारे में शोध का दिशाईं एगो व्यापक अध्ययन का बाद पावल गइल कि “डाक्टरी परामर्श खातिर औसतन सात...

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माई बाप अउर सुख दुख

– पाण्डेय हरिराम जिनगी माई के अँचरा के गाँठ जइसन होले. गाँठ खुलत जाले. कवनो में से दुख त कवनो में से सुख निकल आवेला. हमनी का अपना दुख में भा सुख में भुलाइल रहीले. ना त माई के अँचरा याद रहेला ना ओह गाँठ के खोल के माई के...

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