महीना: अगस्त 2015

बढ़ावन – 2 : भोजपुरी लोक के गृहस्थ-संस्कृति

– डाॅ. अशोक द्विवेदी गंगा, सरजू, सोन का पाट में फइलल खेतिहर-संस्कृति दरसल “परिवार” का नेइं पर बनल गृहस्थ संस्कृति हऽ. परिवार बना के रहे खातिर पुरुष स्त्री क गँठजोरा क के बिवाह संस्कार से बान्हल आ मर्यादित कइला...

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टटका खबर (शनिचर, 22 अगस्त 2015, देश दुनिया)

पाकिस्तान जानत बा कि ओकर एनएसए सरताज भारत के एनएसए के मुकाबले टिक ना पइहें आ बढ़िया रही कि पाकिस्तान एह बातचीत के रद्द कर देव. अबहीं भारत का लगे पाकिस्तानी आतंकवाद के जियत जागत सबूत नवेद मौजूद बा आ कराची में रहत भारत में आतंकी...

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टटका खबर (शुक, 21 अगस्त 2015, देश-दुनिया)

शुक का दिने पटना में बिहार सरकार के गेस्ट हाउस का लिफ्ट में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आ बिहार भाजपा के कुछ नेता लिफ्ट मे फँस गइले. चालीस मिनट बाद कार्यकर्ता आ सुरक्षा कर्मी लिफ्ट के तूड़ के एह लोग के बाहर निकललन. भाजपा एकरा के...

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कविता लिखे के लकम

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ सन् 1976-77 में, जब हम गाँव के प्राथमिक विद्यालय में तीसरा-चउथा के विद्यार्थी रहीं, ओह घरी हर सनीचर के अंतिम दू घंटी में सांस्कृतिक कार्यक्रम होखे. ओकरा में हमनी कुल्ह विद्यार्थी इयाद...

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बढ़ावन – 1 : लोक का भाव-भूमि पर

– डाॅ. अशोक द्विवेदी हमार बाबा, ढेर पढ़ुवा लोगन का बचकाना गलती आ अज्ञान पर हँसत झट से कहसु, “पढ़ लिखि भइले लखनचन पाड़ा !” पाड़ा माने मूरख; समाजिक अनुभव-ज्ञान से शून्य. आजकल तऽ लखनचंद क जमात अउर बढ़ले चलल जाता. ए...

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