अन्ना – मलाई कि छेना

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तमिलनाडु के राजनीति में एगो बड़हन उलटफेर होखत लउकत बा। एह पर तरह तरह के चरचा मीडिया में चल रहल बा। बहुत कुछ राजनीतिक विद्वानन ला बा बाकिर भोजपुरी के पहिलका वेबसाइट पर एकर चरचा ओही अंदाज में ना कइल जा सके। हमनी के कोशिश होला कि आम आदमी का नजरिया से हालात के देखल-परखल जाव।
एह लेख के मथैला पढ़ि के कुछ अंदाजा लागल होखी रउरो। दूध के बढ़िया से अँउटा लीहल जाव त थोड़का देर बाद ओह पर मलाई के एगो परत बन जाला। बाकिर अगर खउलत दूध में कुछ खटाई भा नींबू भा दही भा फिटकिरी वगैरह के सहारा ले के ओकरा के फाड़ दीहल जाव त छेना बन जाला। छेना बनावल जाला जब दूध अपने से फाट जाव त उहो छेना का तरह हो जाला। कई बेर ओकरो के छेना का तरह ग्रहण कर लीहल जाला।
एही चलते अन्नामलाई के ले के हम सवाल उठवले बानी कि अन्ना मलाई हउवन कि उनुका के छेना में बदलल जा रहल बा भा ई कि दूध खराब होके फाटे जा रहल बा? एक आ एक दू होला बाकिर जब विद्वानन का बीच इहे सवाल पूछल जाला त ओकर जबाब इहे होला कि एक आ एक मिल के दू ओ होला आ एगारहो हो सकेला। आ ई एह पर निर्भर करत बा कि एक आ एक के रउरा कवना तरह से मिलावल-जोड़ल चाहत बानी। अगर एक दोसरा में समाहित हो जाए वाला अंदाज में मिलावल जाव त दू बन जाला बाकिर अगल-बगल स्वतंत्र रूप से राख दीहल जाव त एगारह हो जाला।
सुने में आ रहल बा कि अपना जनम दिन का दिने अन्नामलाई तमिलनाडु में एगो अलगा दल बनावे जा रहल बाड़न भा एगो स्वतंत्र आंदोलन छेड़े जा रहल बाड़न जवना के परिणति एगो नया दल का रूप में हो सकेला। आ एकरे के अलग-अलग तरीका से देखल जा रहल बा।
एक तरह के विचार ई बतावत बा कि जवना तरह से भाजपा अन्नामलाई के किनारे कर दिहलसि अपना चुनावी गणित का चलते ओहसे अन्नामलाई निराश हो गइलन। भाजपा उनुका के तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटवले रहल त अंदाजा रहुवे कि अन्नामलाई के केन्द्र में कवनो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दीहल जाई। बाकिर अन्नाद्रमुक का दबाव का चलते उनुका के किनारही छोड़ दीहल गइल। अब जइसन चरचा बा ओकरा में बतावल जा रहल बा कि भाजपा अन्नामलाई के राज्यसभा भेजल चाहत बिया। बाकिर अन्नामलाई एकरा से सहमत नइखन। शायद उनुकर विचार कुछ अउर रहल जवना का चलते ऊ आईपीएस के नौकरी छोड़ के राजनीति में उतरल रहलन। अन्नामलाई के लागत बा कि भाजपा में रहके ऊ आपन सपना पूरा ना कर पइहें।
दोसरा तरह के चरचा ई चल रहल बा कि भाजपा अन्नामलाई के मलाई का रूप में ना छेना का रूप में इस्तेमाल कइल चाहत बिया। एह छेना से तरकारीओ बन सकेला, मिठाईओ बनावल जा सकेला, भा एकरा के अइसहीं खाइल जा सकेला। भाजपा के लागत बा कि अन्नामलाई एगो संपति का रूप में बाड़न आ एकर पूरा उपयोग करेला जरूरी बा कि एकरा के खुला छूट टीहल जाव। दल के वैचारिक बोझा ढोवले बिना अगर ऊ अपना मकसद का तरफ बढ़सु त बेसी काम के साबित होखिहन। जब कांग्रेस भा दोसरा गोल से आइल लोगन के भाजपा आपन ताकत बना सकेले त अन्नामलाई जइसन ताकत के खुला छूट देके अपना खातिर एगो वैकल्पिक जमीन बना सकेले।
संघ संचालित संगठनन में एह तरह के बंदोबस्त खूब देखे के मिलेला अगर लोग देखल चाहे। बाकायदा योजना बना के अपना दूगो कार्यकर्तन भा नेतन के आमने-सामने भिड़ा के अपना लक्ष्य के चहुँपे के रणनीतिओ रहेला एह तरह के विवाद भा विभाजन करा के।
तमिलनाडु के राजनीति में बहुत कुछ अइसन होखेला जवना का साथे भाजपा के तारतम्य बइठल भा बइठावल कठिन होखेला। जइसे कि भाषा विवाद। जोसफ विजय के मुख्यमंत्री बनला का बाद तमिलनाडु के राजनीति के शतरंज कुछ अलगे तरह से खेलल मजबूरी हो गइल बा।
भाषायी विवाद पर भाजपा से अलग एगो स्वतंत्र विचार का साथे अन्नामलाई तमिलनाडु मे ओहू लोग के छितराए से रोक सकेले जे भाजपा के समर्थक तो होला बाकिर भाजपा के राजनीतिक चालन से सहमत ना होखे। तमिलनाडु के राजनीति में एगो नया तरह के संभावना बनल बा। द्रविड़ राजनीति से आजाद होके तमिलनाडु अब एगो नया ट्रैजेक्टरी पर बढ़ चलल बा। भाजपा ना त जोसफ विजय के एकदम से आपन प्रतिद्वन्द्वी बना सकेले ना बदलत हालात में द्रमुको के अनदेखी कर सकेले। भाजपा अपना दीर्घकालिक लक्ष्य खातिर छोटमोट समझौता करे से लजाए ना। कश्मीर में महबूबा का साथे गठबन्हन कइल एकर एगो शानदार उदाहरण बा। अभी भाजपा के अपना कई गो लक्ष्यन के पावे ला लोकसभा आ राज्यसभा दुनु जगहा अधिक से अधिक समर्थन के जोगाड़ कइल जरुरी बा। एकरा खातिर सनातन के उन्मूलन के बात करे वाला द्रमुक से सांठगाँठ कइल भाजपा ला कवनो बड़हन पाप ना होखी। तूणमूलियन के आवहूं ना दी आ जाहूं ना दी। हो सकेला कि शिवसेना आ राकांपा का तरह तृणमूलो के पार्टी, चुनाव चिह्न वगैरह सब कुछ हथिया लेबे के कवनो योजना बन रहल होखे त हमरा जइसन सोचे वाला लोगन ला अचरज के बात ना होखी।
बाकिर अबहीं बहुत कुछ साफ नइखे से इंतजार करे के पड़ी कि कइसे गोटी बइठावत बिया भाजपा आ अन्नामलाई के मलाई का तरह चाहत बिया कि छेना का तरह। रउरा का लागत बा?


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