लेखक: Editor

चक्कर बनाम चस्का

(ललित-व्यंग) – डा0 अशोक द्विवेदी आदमी आखिर आदमी हs — अपना मूल सोभाव आ प्रवृत्तियन से जुड़ल-बन्हाइल। मोह-ममता के लस्का आ कुछ कुछ आदत से लचार। ओकर परम ललसा ई हवे कि ऊ तरक्की करो आ सुख से रहो ! ई सुखवो गजब क चीझु ह s।...

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राष्ट्र प्रेम के एगो गीत

मान  बढ़ाईं  जा माटी के    रामरक्षा मिश्र विमल दुअरा अंगना कहिया छिटकी मधुर किरिनिया भोर के कहिया  पन्ना  पलटल जाई  भारत माँ के  लोर के ?   तमिल तेलगू बङला हिन्दी सब  ह  भारत  के  भाषा अपना जगह  सभे  कंचन बा  एको  ना  बाटे ...

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राजकुमार आर पाण्डेय की ‘ दुलारा’ को बेस्ट सोशल इशु के लिए मिला जूरी अवार्ड

कई साल पहले लोगो के मनोरंजन के लिए जब कोई साधन नही हुआ करता था तब लौंडा नाच यह नाच काफी फेमस और...

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