लेखक: Editor

टेंशन दीहल जाला, लीहल ना जाव ! (बतंगड़ – 5)

– ओ. पी. सिंह टेंशन दीहल जाला, लीहल ना जाव. जिनिगी का हर मैदान में ई रणनीति मजगर साबित होले बशर्ते रउरा मे बेंवत होखे सोझा वाला के टेंशन दे सके के. ब्लफ मारत खाली फँउके ला फँउके वाला के ई चाल उलुटो पड़ सकेला. जइसे कि अब...

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भर घर देवर, भतारे से ठट्ठा (बाति के बतंगड़ – 4)

– ओ. पी. सिंह भर घर देवर, भतारे से ठट्ठा. कहाउत पुरान ह. जब ना त हम रहनी, ना मोदी जी. बाकिर हालही में मोदी जी के एगो बयान सुनि के मन में इहे कहउतिया याद पड़ गउवे. मोदी जी के दुश्मनन के कमी नइखे बाकिर पता ना का सोचि के ऊ...

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