लेखक: Editor

जनतब, अनचिन्हार आ परिचिताह (बतकुच्चन – 184)

जनतब, अनचिन्हार आ परिचिताह. तीनो के तीनो जान-पहचान से जुड़ल शब्द आ आजु के बतकुच्चन एकनिए पर. जनतब के जगहा हिन्दी में जंतव्य ना होखे आ हिन्दी के गंतव्य का जगहा भोजपुरी में गनतब ना भेंटाव. परिचित त हिन्दीओ में भेंटा जाई बाकिर...

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कलयुग

– डॉ॰ उमेशजी ओझा रउरा मानी चाहे ना मानी, बाकिर धोखाघड़ी, ठगी आ एक दोसरा के टॉग खींचे के जमाना में ईमानदारी के मजे मजा बा. रउरा सभे के हमार बात अटपटा लागत होई, हमरा के पागल आ सनकी समझत होखब, कि कलयुग आ भ्रष्टाचार के जुग में...

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राजीव उपाध्याय के तीन गो कविता

(1) मन के चाकरी मन के चाकरी कइनी जीवन सगरी अब का करीं, हमके अब त बता द। मन के चाकरी कइनी जीवन सगरी॥ एने.ओने जानी, कुछू ना बुझाला, हवे ई ओसारा कि ह ई सिवाला। मन के चाकरी कइनी जीवन सगरी॥ खेत हवे कि बारी, कि गाँव के दुआर, नदिओ ना...

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‘तू मेरा हीरो’ का पहला दिन – पहला शो – बम्पर ओपनिंग

शुक्रवार २७ मार्च को मुम्बई में प्रदर्शित हुई बहुचर्चित भोजपुरी फिल्म ‘तू मेरा हीरो’ का पहला दिन का पहला शो बम्पर ओपनिंग के साथ हाउसफुल रहा. फ़िल्म मुम्बई में जहाँ भी रिलीज की गई है हर जगह दर्शकों की भारी भीड़ के साथ...

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मुबई में चला “साथियां” का जादू

मुंबई में भोजपुरी फिल्म ‘साथियां’ का जादू खूब चला और इस फिल्म को देखने के लिये लोगो की सभी सिनेमाघरो में लंबी लंबी लाईने देखी गयी. और थोड़ी ही देर में सिनेमाघरों के बाहर हाउसफुल का बोर्ड लग गया. आदिशक्ति इंटरटेनमेंट...

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