अरे, रंग बरसे भीजे चूनरवाली.. अरे कैसे रे भाई !
– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद आ रामचेला फगुआ में कोलकाता अइले. उहां मिडल क्लास में पढ़े वाला उनकर नाती जब पूछलस कि बाबा हो ‘रंग बरसे भीजे चूनर वाली..’ गीत के माने का होई. सांचो हो पहिले त बाबा कबीर कहत रहले ‘बरसे कमर भीजे...
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