Category: भाषा

बखरा बखोरल (बतकुच्चन 173)

आजु बतकुच्चन लिखे बइठल बानी त खबर में बाँट-बखरा के चरचा गरम बा आ हम सोचत बानी कि बाँट-बखरा कि बाट-बखरा. बखरा के चरचा का पहिले बाट आ बाँट के चरचा क लिहल जरूरी लागत बा. बखरा कई तरह से हो सकेला आ बाँट के आ बाट से तउल के ओही में से...

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पढ़ीह लिखीह कवनो भासा, बतियइह भोजपुरी में (बतकुच्चन 172)

अंगरेजी में ए, हिंदी में ए, ऐ, न आ व, बाकिर भोजपुरी में आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, क, त, द, ध, न, प, ल, स आ ह. बात वर्णमाला के नइखे होखत. बात होखत बा शब्दन के. व्याकरण में पढ़ावल जाला कि ध्वनि से अक्षर बनेला, अक्षर से शब्द, शब्द से...

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जो सहाय रघुबीर (बतकुच्चन 171)

ना नीमन काम करे ना दरबारे ध के जाव! बतकुच्चन लिखे बइठल रहीं त इहे कहाउत ध्यान में रहल. लिखे के कुछ अउर रहल बाकिर मन में कुछ दोसरे सवाल उठे लागल. अधिकतर कहाउत का पीछे कवनो ना कवनो कहानी रहल बा. आ ओह कहानी के शीर्षक भा मथैला बाद...

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माई बाबूजी जब मम्मी आ डैडी हो गइले (बतकुच्चन 170)

माई बाबूजी कब मम्मी डैडी हो गइल लोग केहू के पता ना लागल. बाकिर आजु टीचर के गुरू कहला पर बखेड़ा खड़ा करे के कोशिश हो रहल बा. एहसे कि ई उलटा चाल बा. कहल जाला कि आदमी के भाषा में ओकर संस्कृति लउकेला, संस्कार झलकेला. एहसे जब कवनो...

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गोलबंदी, गठबन्हन आ कि गिरोहबन्दी (बतकुच्चन 169)

लागत ब कि मउराइल लोग फेरु मउराइल हो गइल बा. जान में जान आ गइल बा. कहल जात बा कि दहाड़त शेर प काबू पा लिहले बाड़े जंगल के सियार लोमड़ी आ मूस. बस अब तनिका जोर लगावे के बा आ शेर के बाहर क दिहल जाई. आ हम सोचत बानी कि एह गठजोड़ के का...

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अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

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