भोजपुरी लिखे पढ़े के कठिनाई आ काट
– डा॰ प्रकाश उदय भाषा-विज्ञान में जवना के भाषा कहल जाला, तवना में, जवन कहे के होला, जतना आ जइसे, तवन कहा पाइत ततना आ तइसे, त केहू के ‘आने कि’, ‘माने कि’, ‘बूझि जा जे’ भा ‘जानि जाईं...
Read More– डा॰ प्रकाश उदय भाषा-विज्ञान में जवना के भाषा कहल जाला, तवना में, जवन कहे के होला, जतना आ जइसे, तवन कहा पाइत ततना आ तइसे, त केहू के ‘आने कि’, ‘माने कि’, ‘बूझि जा जे’ भा ‘जानि जाईं...
Read Moreभोजपुरी में बतियाईं मत आ जे बतियावे ओकरा के गँवार बताईं. बचवन के भोजपुरी में बतियावे मत दीं. अंगरेजी में गिटिर पिटिर करीहें स त ढेर आगा जइहें सँ. भोजपुरी के कवनो किताब, पत्रिका ना त खरीदीं ना पढ़े के कोशिश करीं. काहे कि भोजपुरी...
Read MorePosted by Editor | Jan 3, 2015 | पुस्तक चर्चा, भाषा, साहित्य |
– अशोक द्विवेदी पत्रिका के 74वाँ अंक रउवा सभ के सामने परोसत हम अपना स्रम के बड़भागी मान रहल बानी जे 1979 से जूझत-जागत, ठोंकत-ठेठावत हमनी का पैंतीसवाँ बरिस में चलि अइली जा। एह यात्रा में, सँग-सँग कुछ डेग चले वाला हर...
Read Moreसहकल, बहकल आ डहकल के चरचा करे के मन करत बा आजु. काहे कि देश में कुछ लोग के अतना सहका दिहल गइल बा कि ऊ बहकल बन गइल बाड़े आ एह बात के कवनो चिन्ता नइखन करत कि उनकर बेवहार केहू के डहकावतो बा. सहके से सहकत, बहके से बहकत, आ डहके से...
Read Moreए सूरदास, घीव पड़ल? कड़कड़ाव तब नू जानी. कारण आ परिणाम के एह उदाहरण में परिणाम से पता चलत बा कारण का बारे में. सूरदास खातिर परिणामे प्रमाण बा कि कारण मौजूद हो गइल. हालांकि केहू के हवा से अगर कवनो गोल के लगातार जीत मिलल जात होखे...
Read More
Recent Comments