शरद के मालगाड़ी

देखऽ आइल शरद के मालगाड़ी.
सन सन करत सीटी बजावत,
झंडी लाल पीयर हरियर हिलावत,
देखऽ आइल शरद के मालगाड़ी.
सरकत जात लह लह खेत से,
नदिया पुल परती रेत से,
गुजरल रास्ता जंगल पहाड़ी.
हवा संग सगीत गावत
कच्ची फसल के गुदगदावत,
झकझोरत् सब पेड़ झाड़ी.
लाल हरियर पीयर पक्कल
फल मक्कई गन्ना रस भरल
घर बाजार आइल उपज सारी.
सब घर बार के सिंगार होता,
सजावट तोरन बंदनवार होता,
होता दसहरा छठ गोधन दिवाली।
देखऽ आइल शरद के मालगाड़ी।
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अमेरिका के न्युयोर्क में रहे वाला डाॅ. कमल सिंह के परिचय उनहीं का शब्द में —
जनम बक्सर जिला के बरुहां गाँव में, स्कूली शिक्षा बरुहां आ बगेन स्कूल में। कॉलेजी शिक्षा पटना साइंस कॉलेज आ ओकरा बाद पटना मेडिकल कौलेज में। शिशुरोग विशेषज्ञ बनला का बाद ब्रिटेन चल गइनी। ओहिजा से अउरी उच्च शिक्षा पा के अमेरिका आ गइनी। अमेरिका मे अपना अस्पताल के शिशु विभाग के अध्यक्ष पद पर 15 बरीस ले काम कइनी। फेर आपन क्लिनिको खोल लीहनी। पिछला साल अपना अस्पताल से ‘इफ टाइम एचीभमेन्ट एवार्ड’ अउर अपना कॉलेज के शतक समारोह में ‘पटना मेडिकल कॉलेज-श्री ‘ के उपाधि पवनी। कविता करे के प्रेरणा हमरा अपना बगेन स्कूल के प्रबुद्ध आ आदरणीय शिक्षक स्वर्गीय विजेन्द अनिल, दामोदर मिश्र, अउर रघुनाथ सिंह जी से, गीत लिखे आ गावे के प्रेरणा अपना बड़का भैया स्वर्गीय कैलाश चंद्र चौधरी से मिलल।
भोजपुरी के हमार लगभग सभ कविता अंजोरिया मे छपल बा. हिन्दी के कुछ कविता सिर्जनगाथा में छपल बा। कविता लिखे के लगन अबहूँ कम नइखे भइल। गीत विधा मे लिखल आ अपने गावल हमरा ज्यादा पसंद बा।
हमार बस तीन गो (P) पैशन बा –
पिडिएट्रिक्श, पोएट्री अउर प्लान्ट्स
सादर,
कमल किशोर

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