श्रेणी: भाषा

बेमानी आ बेईमानी के बात (बतकुच्चन – 181)

ए सूरदास, घीव पड़ल? कड़कड़ाव तब नू जानी. कारण आ परिणाम के एह उदाहरण में परिणाम से पता चलत बा कारण का बारे में. सूरदास खातिर परिणामे प्रमाण बा कि कारण मौजूद हो गइल. हालांकि केहू के हवा से अगर कवनो गोल के लगातार जीत मिलल जात होखे...

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अर्थ, अनर्थ आ कुअर्थ के चरचा (बतकुच्चन – 180)

अर्थ का बिना सबकुछ व्यर्थ होला. चाहे ऊ कवनो बाति होखो भा आदमी. कुछ दिन पहिले हम कहले रहीं अर्थ, अनर्थ, कुअर्थ वगैरह के चरचा के बात. फेर बीच में कुछ दोसर बाति निकलत गइल बाकिर ऊ बाति बिसरल ना रहुवे से आजु ओहिजे से शुरू करत बानी....

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नवासी का फेर में आवासी आ निवासी के चरचा (बतकुच्चन – 179)

पिछला 2 नवंबर का दिने मारीशस आप्रवासियन के अइला के 180वां सालगिरह मनवलसि. एही दिने भारत से गइल गिरमिटिहा मजदूर पहिला बेर मारीशस का किनार पर पानी के जहाज से आ के उतरल रहले. आ हमरा बतकुच्चन के मसाला मिल गइल. आप्रवासी शब्द पढ़ के...

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भोजपुरी पंचायत पत्रिका के दिसम्बर 14 वाला अंक

बावन पेज के पत्रिका, चार पेज विज्ञापन के, चार पेज संपादकीय सामग्री, बाँचल चउवालीस पेज. तरह तरह के तेरह गो संपादक बाकिर प्रूफ आ भाषा के गलतियन के भरमार का बीच भोजपुरी पंचायत पत्रिका के दिसम्बर 14 वाला अंक में भोजपुरी में मिलल...

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गति से दुर्गति ले (बतकुच्चन – 178)

एगो गति संज्ञा होले आ दोसरका गति भा गत विशेषण. दुनू में छोटकी इ के मात्रा लागेला बाकिर दोसरका गति से छोटकी इ के मात्रा हट गइल काहे कि उ मात्रा छोटको ले छोटकी इ के रहुवे जवन बोले में त सहज लागी बाकिर लिखत में असहज क देले. जइसे कि...

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