बबुअवा से त बबुनिए नीमन (बतकुच्चन – १२८)
बबुअवा से त बबुनिए नीमन रहीत. बाकिर का कइल जाव, उ आन घर के हो गइल आ दमदा नाम कमा लिहले बा. एहसे अब बबुनिया के आगे करे में डर लागत बा. बाकिर एह मुद्दा पर आगे कुछ कहि के फसल ना चाहब आ लवटब पिछला दिन का बाढ़ का तरफ. आए दिन खबर मिलत...
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