Category: भाषा

बबुअवा से त बबुनिए नीमन (बतकुच्चन – १२८)

बबुअवा से त बबुनिए नीमन रहीत. बाकिर का कइल जाव, उ आन घर के हो गइल आ दमदा नाम कमा लिहले बा. एहसे अब बबुनिया के आगे करे में डर लागत बा. बाकिर एह मुद्दा पर आगे कुछ कहि के फसल ना चाहब आ लवटब पिछला दिन का बाढ़ का तरफ. आए दिन खबर मिलत...

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शासन चलावल, बच्चा पालल आ दूध उबालल बिना खड़ा भइले ना हो पावे ( बतकुच्चन – १२७)

गंगा, तिरंगा, नवरंगा, बहुरंगा, एकरंगा, लफंगा, भिखमंगा, लंगा, आ दंगा. तिरंगा आ बहुरंगा आबादी वाला अपना देश में गंगा के महत्व बहुते बा. बाकिर गंगा के खासियते में एगो अइसन गुन लुकाइल बा जवना के केहू बढ़ियो कह सकेला त केहू खराबो....

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ई अतते कबले (बतकुच्चन – १२६)

ई अतते कबले, जब ले चले तबले. पिछलका पख में संसद से लिहले सड़क ले कुछ अइसने नजारा देखे के मिलल जवना से मन में ई सवाल उठ गइल कि ई अतते कब ले? आ संगही जबाबो मिल गइल कि जब ले चले तबले. कवनो अति तबहिए ले चल पावेला जब ले ओकरा के भुगते...

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कदुआ पर सितुहा चोख (बतकुच्चन – १२५)

कदुआ पर सितुहा चोख. एह भोजपुरी कहाउत के मतलब होला कि कमजोर भा सिधवा पर उहो भारी पड़ जाला भा तेज बन जाला जे वइसे त महाभोथर गिनाला. अइसने एगो अउर कहाउत ह कि गरीब के जोरू गाँव भर के भउजाई. एहिजा गरीब के मतलब धन आ बल दुनु के कमजोरकन...

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बकवास, भाषण, संबोधन, आ प्रवचन (बतकुच्चन – १२४)

बकवास, भाषण, संबोधन, आ प्रवचन चारो एकही काम के अलग अलग जाति ह. चारो में बहुत हद तक समानता मिल सकेला भा जवन एक आदमी ला बकवास होखी उ दोसरा ला प्रवचन हो सकेला. चारो में एक आदमी बोलेला आ बाकी लोग सुनेला. सुने वालन के काम हँ में हँ...

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