Category: भाषा

बतकुच्चन – ९८

केहू ढुकल, केहू ढुकावल, आ केहू ढुका लागल देखत रहि गइल. ढकना, ढकनी, ढाकल, तोपल त बहुते सुनले बानी आजु ढुकले पर चरचा कर लिहल जाव. ढुकल आ घुसल दुनु के मतलब एके जस होला. धेयान दीं एके जस, एके ना. काहे कि घुसल कहला में तनी सीनाजोरी,...

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"फगुआ के पहरा" पर एक नजर

– मनोकामना सिंह ‘अजय’ आदरणीय डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल जी, सादर प्रणाम. अपने के भेजल “फगुआ के पहरा” सावन में भाई गंगा प्रसाद अरुण के मार्फत मिलल. राउर गजल के ई लाइन हमनी पर बिलकुल ठीक बइठत बा –...

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बतकुच्चन – ९७

मन में एगो सवाल उठल बा कि पोसल आ पोसुआ में फरक होला कि ना? आ होला त का फरक होला. सवाल एह से उठल कि आजु चारो ओर पोसल आ पोसुआ लोग के भरमार हो गइल बा. केहू अपना चेला चाटी के पोसत बा त कुछ चेला चाटी पोसुआ होखत जात बाड़ें. अब देखीं...

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विविधा : भोजपुरी साहित्य के एगो संदर्भ ग्रंथ

‘विविधा’ सुप्रसिद्ध आचार्य पांडेय कपिल द्वारा संपादित भोजपुरी पत्रिकन के संपादकीय आलेखन के संग्रह हऽ. ई सभ आलेख उहाँ के द्वारा संपादित लोग, उरेह, भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका (त्रैमासिक) आ भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका (मासिक) के दिसंबर,...

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बतकुच्चन – ९६

सोचऽतानी कि अगर एके जइसन मतलब वाला कई गो शब्द ना रहीतन स त हमार बतकुच्चन कइसे चलीत. पिछला दिने ट्वीटर पर एगो सवाल मिल गइल. पूछाइल रहे कि कैमरा के हिन्दी का होई. अब फोटो खींचे वाला कैमरा के त आम बोलचाल में हिन्दीओ में कैमरे कहल...

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🤖 अंजोरिया में ChatGPT के सहयोग

अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

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