बतकुच्चन १०६
आजु पता ना काहे मन करत बा कि बिर्हनी के छत्ता खरकोंच दी. काहे कि एने कुछ दिन से मधुमाखी के छत्ता चरचा में आ गइल बा. अब मधुमाखियन के भरभरा के निकल पड़े खातिर अतने बहुत बा. बिना कुछ अउर बोललहू लोग भँभोरे निकल पड़ी बाकिर आजु त कहला...
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