"फगुआ के पहरा" पर एक नजर
– मनोकामना सिंह ‘अजय’ आदरणीय डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल जी, सादर प्रणाम. अपने के भेजल “फगुआ के पहरा” सावन में भाई गंगा प्रसाद अरुण के मार्फत मिलल. राउर गजल के ई लाइन हमनी पर बिलकुल ठीक बइठत बा –...
Read More– मनोकामना सिंह ‘अजय’ आदरणीय डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल जी, सादर प्रणाम. अपने के भेजल “फगुआ के पहरा” सावन में भाई गंगा प्रसाद अरुण के मार्फत मिलल. राउर गजल के ई लाइन हमनी पर बिलकुल ठीक बइठत बा –...
Read Moreमन में एगो सवाल उठल बा कि पोसल आ पोसुआ में फरक होला कि ना? आ होला त का फरक होला. सवाल एह से उठल कि आजु चारो ओर पोसल आ पोसुआ लोग के भरमार हो गइल बा. केहू अपना चेला चाटी के पोसत बा त कुछ चेला चाटी पोसुआ होखत जात बाड़ें. अब देखीं...
Read MorePosted by Editor | फरवरी 10, 2013 | पुस्तक चर्चा, भाषा, समीक्षा, साहित्य |
‘विविधा’ सुप्रसिद्ध आचार्य पांडेय कपिल द्वारा संपादित भोजपुरी पत्रिकन के संपादकीय आलेखन के संग्रह हऽ. ई सभ आलेख उहाँ के द्वारा संपादित लोग, उरेह, भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका (त्रैमासिक) आ भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका (मासिक) के दिसंबर,...
Read Moreसोचऽतानी कि अगर एके जइसन मतलब वाला कई गो शब्द ना रहीतन स त हमार बतकुच्चन कइसे चलीत. पिछला दिने ट्वीटर पर एगो सवाल मिल गइल. पूछाइल रहे कि कैमरा के हिन्दी का होई. अब फोटो खींचे वाला कैमरा के त आम बोलचाल में हिन्दीओ में कैमरे कहल...
Read MorePosted by Editor | जनवरी 30, 2013 | पुस्तक चर्चा, भाषा, सरोकार |
अधिकतर रचना हिंदी में रहे वाला एह पत्रिका के अबकी के अंक में बिहार आ दिल्ली के राजनीतिक चरचा का अलावे, भोजपुरी गौरव उमाशंकर सिंह के निधन से जुड़ल खबर, छपरे के कोठियाँ नराँव गाँव के समाजसेवी हरिदयालबाबू के निधन पर लेख, दिल्ली के...
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