बतकुच्चन – १०३
कवन अभागा गाँजा बोवलसि हो/पियवा बउरा गइलें. कवन पापी घोर के पियवलसि हो/पियवा बउरा गइलें. ना ना, हम...
Read Moreकवन अभागा गाँजा बोवलसि हो/पियवा बउरा गइलें. कवन पापी घोर के पियवलसि हो/पियवा बउरा गइलें. ना ना, हम...
Read Moreपिछला हफ्ता एक जने के पटावे खातिर दोसरा जने के पठा दिहल गइल. जिनका के पठावल गइल से ओह राज्य के पालक रहलें आ लोग कहत बा कि एह बहाने उनुका के पटावे के कोशिश कइल गइल बा जिनकर सहारा अगिला साल के चुनाव का बाद लेबे के जरूरत पड़ सकेला....
Read More“संतोख अतने बा / कि गाँव अपना में अझुराइल / अपने में परेशान / अपने में मगन / अतने में गील / कि हिनिके उड़ा देब! / हुनके भठा देब! / उनकर मामर हेठ करब! / बहुत जल्दिये गोटी सेट करब!!” ना, ना. गलत समुझला के जरूरत नइखे....
Read Moreपिछला कुछ महीना से फाँसी का फैसला पर गृहमंत्रालय अतना फदफदा गइल बा कि ताबड़तोड़ फाँसी सकारे के सलाह दिहले जात बा. अब एह बात पर बहुते कुछ मन करे लागल कहे सुने के. बाकिर आजु के हालात अइसन हो गइल बा कि बतियावे के आजादी भले होखे बतावे...
Read Moreलाजे भवहि बोलसु ना, सवादे भसुर छोड़सु ना. अब एह बाति पर भड़कला के कवनो जरूरत नइखे. ई कहाउत हमार बनावल ना ह आ जमाना से चलल आवत बा. इहो बाति नइखे कि हमरा फगुनाहट लाग गइल बा. काहे कि फागुन के आहट बतावे वाला बयार अब भेंटात नइखे...
Read More