Category: भाषा

बतकुच्चन – ६२

हमरा हियाँ अइब त का का ले अइब? तोहरा किहाँ जाएब त का का खिअइब? एह भोजपुरी कहावत में समाज के सुभाव झलकत बा जहाँ आदमी सिर्फ अपना मतलब से मतलब राखे लागल बा. हर हाल में फायदा ओकरे होखे के चाहीं आ अइसे कि सामने वाला के पतो ना लागे भा...

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बतकुच्चन – ६१

पिछला हफ्ता बड़की पंचायत के साठ साल पूरा भइला पर इहे लागल कि साठा त अब भइल बाकिर सठियाइल जमाना से बा. अब त अधिकृत तौर पर सठिया गइल कहल जा सकेला ना त साठ साल पुरान बात पर लट्ठ ले के ना निकलल रहीत लोग. बुड़बक मरले बिराने फिकिरे....

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बतकुच्चन – ६०

रोए के रहनी तले अँखिए खोदा गइल. एह भोजपुरी कहाउत के सीधा मतलब त इहे निकलेला कि कुछ खराब सोचते रहीं कि ऊ होइओ गइल. पता ना अनिष्ट अनेसा में अइसन कवन खासियत होला कि सोचलीं त हो के रही. अगर कुछ गलत होखे के अनेसा मन में बनल बा त जान...

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बतकुच्चन – ५९

आजु जब बतकुच्चन लिखे बइठल बानी त सामने दू गो मौत के खबर पड़ल बा. एगो चंदौली के भोजपुरी कवि रामजियावन दास बावला के आ दोसरका गोरखपुर के आचार्य प्रतापादित्य के. अब बतकुच्चन के ई विषय त ह ना बाकिर दिमाग जे बा से कि एही पर अटक के रहि...

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बतकुच्चन – ५८

भाषा संस्कार से बनेला कि भाषा से संस्कार बनेला एह बाति पर ढेरहन बतकुच्चन कइल जा सकेला. बाकिर एह बाति पर ना कि साहित्य समाज के दर्पण होले. साहित्य के रूप हर समय बदलत रहेला आ आजु के साहित्य में एसएमएस, ट्विट भा फेसबुक अपडेट शामिल...

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अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

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