बतकुच्चन – ६२
हमरा हियाँ अइब त का का ले अइब? तोहरा किहाँ जाएब त का का खिअइब? एह भोजपुरी कहावत में समाज के सुभाव झलकत बा जहाँ आदमी सिर्फ अपना मतलब से मतलब राखे लागल बा. हर हाल में फायदा ओकरे होखे के चाहीं आ अइसे कि सामने वाला के पतो ना लागे भा...
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