श्रेणी: साहित्य

बतकुच्चन ‍ – ७३

गोल के बात का निकलल पिछला बेर कि माथा गोल हो गइल. मन में तरह तरह के सोच आपन आपन गोलबन्दी करे लागल. एह में गोलियात तीन गो शब्द सामने आइल गोल, गोला आ गोली. गोल कवनो समूह के कहल जाला. ई गोल खिलाड़ियन के होखे, होरिहारन के होखे, कवनो...

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फगुआ के पहरा: डा॰ विमल के काव्य संग्रह

डा॰ रामरक्षा मिश्र विमल के हालही में प्रकाशित काव्य संग्रह “फगुआ के पहरा” में २७ गो गीत, २२ गो गजल आ ६ गो कविता बाड़ी सँ. डा॰ विमल हिन्दी आ भोजपुरी के साहित्यकार हईं आ मूल रूप से गीतकार हईं. अँजोरिया के सौभाग्य बा कि...

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बतकुच्चन – ७०

लस्टम पस्टम में दिहल ज्योति जी के सवाल पर कुछ कहे से पहिले एक बात साफ कर दिहल जरूरी लागत बा. हम ना त भाषा शास्त्री हईं ना भाषा वैज्ञानिक. हम त बस नाच के लबार हईं, सर्कस के जोकर हईं, रमी के पपलू हईं. शब्दन से खिलवाड़ करत बतकुच्चन...

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गोरखपुर के भोजपुरी "बइठकी"

गोरखपुर के भोजपुरी साहित्यकारन के संस्था “भोजपुरी संगम” के बइठकी हर महीना करावल जाले. २८वीं बइठकी पिछला १० जून के साहित्यकार सत्यनारायण सत्तन का घरे भइल रहे जवना के अध्यक्षता गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी...

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संत तुलसीदास जी

– इं॰ राजेश्वर सिंह महीना के जवने तिथि के जनमि के, सवा सौ साल से अधिक जियले के बाद, ओही तिथि के आपन देहि तजि के दुनिया से सदा-सदा खातिर चलि जाये वाले विरले लोगन में से तुलसीदास जी एक हउअन. तुलसीदास जी कऽ जनम उत्तरप्रदेश...

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