Category: साहित्य

लिट्टी

– केशव मोहन पाण्डेय चार-पाँच दिन से रोज गदबेरे कुक्कुर रोअत रहलें स. बुझात रहल कि ए गाँव में जरूर कुछ बाउर होई. सावन के मेघो तनी देर पहिलहीं दू दिन बाद साँस लेहले हवें. ऊँचास के पानी खलार में बह गइल बा. आ ओह राह में...

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बिजली में तड़प केतना होला अनजान बदरिया का जानी!

देश के बड़ गीतकार गोपालदास नीरज लिखले बाड़े – “गीत अगर मर जायेंगे तो क्या यहाँ रह जायेगा एक सिसकता आसुओं का कारवां रह जायेगा ” गोपालगंज (बिहार) जिला के कटेया अंचल में जनमल राधा मोहन चौबे ‘अंजन’ जी...

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बतकुच्चन ‍ – ९१

हेलल-हेलल भईंसिया पानी में. पिछला हफ्ता गुजरात के चुनाव के पोस्टपोल सर्वे क बाद मन में ई पुरान गाना गूंज उठल. बाकिर चुनाव-चरचा छोड़ हम सोचे लगनी कुछ अउर. हेलल आ घुसल में कुछ फरक होला कि ना, आ होला त का? अगर गीतकार घुसल-घुसल...

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बतकुच्चन ‍ – ८९

बबुनी ससुरा ना जाली मने मने गाजेली. भोजपुरी के ई कहाउत आजु कुछ राजनीतिक गोलो पर सही बइठत लागत बा. देश के बड़का पंचायत में दू गो गोल विदेशी किराना बाजार के विरोध कइला का बावजूद ओकरा के आवे से रोके के मौका पर भाग परइले. बहाना बना...

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बतकुच्चन ‍ – ८८

जब कवनो नेता के अपना पार्टी में रहत असकस लागे लागेला त ऊ अइसन अइसन बयानबाजी शुरू कर देला जवना से पार्टी नेतृत्व के अनकस होखे लागे आ ऊ आपन अहजह आ असकत छोड़त ओह नेता के पार्टी से निकाले के फैसला कर लेव आ ओकरा के उभचुभ से बचा लेव....

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