भड़ास
– नीमन सिंह दिल में गुबार एतना बा कि जहिया निकाल दी एह दुनिया के दानव के ना लागी पता हो जइहें खाक सब जल जाई. रही ना आतंक पता ना लागी आतंकी के. बस ,इंतजार बा गगरिया भर जाव कुपंथी के. भगवानो अब उब गइल होइहें देखत-देखत एह...
Read Moreएह कविता के पढ़े खातिर अँजोरिया पर जाईं.
Read More– नीमन सिंह एक बेर के बात ह, नारद मुनि कहीं से गुजरत रहनी. ओही रास्ता में उनुका एगो आदमी मिलल, उ आदमी कुछ जियादही भोला–भाला, माने कि कुछ–कुछ मुरख जइसन, सोझबउक रहे, अउर ओहपर से करईला आउर नीम चढ़ल वाली बात रहे कि उ तनी कम...
Read MorePosted by Editor | सितम्बर 4, 2012 | पुस्तक चर्चा, सरोकार, साहित्य |
आजु जब भोजपुरी के पत्रिका प्रकाशन के स्थिति खराब चलत बा आ शायदे कवनो पत्रिका बिया जवना के नियमित प्रकाशन आ उहो समय पर हो रहल बा. एह दिसाईं दिल्ली से प्रकाशित होखे वाली पत्रिका भोजपुरी पंचायत बधाई के हकदार बिया कि अपना शुरुआत से...
Read Moreबेर, बेरा, बारी आ बारी. बारी दू बेर आइल एकरो कारण बा. जवन आगा चल के बताएब. बेर मतलब कि आवृति, माने कि हाली. कव हाली भा कव बेर. कतना हाली भा कतना बेर. बाकिर बेर बेरा के बिगड़ल रूपो हो सकेला. बेरा मतलब समय. सबेरा, गदबेरा, एहबेरा,...
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