हे आदित् देव
– ओ.पी. अमृतांशु चिरई-चुरंगिया के होई गइलें शोर ! भइल भोर, हे आदित् देव लागिला गोड़ ! हाथ जोड़ , हे आदित् देव लागिला गोड़ ! देर भइल पनिया में खाड़ बाड़ी जनिया, थर-थर कांपे अउरी ठिठुरे बदनिया, छल-छल छलकेला नेहिया के लोर !...
Read More– ओ.पी. अमृतांशु चिरई-चुरंगिया के होई गइलें शोर ! भइल भोर, हे आदित् देव लागिला गोड़ ! हाथ जोड़ , हे आदित् देव लागिला गोड़ ! देर भइल पनिया में खाड़ बाड़ी जनिया, थर-थर कांपे अउरी ठिठुरे बदनिया, छल-छल छलकेला नेहिया के लोर !...
Read More– अभयकृष्ण त्रिपाठी खइले रहीं कसम अब कलम ना उठाएब, सबसे पहिले मन के अन्धकार मिटाएब. दिन बीतल युग बीतल बीत गइल हर काल, मोहमाया के चक्रव्यूह के नाही टूटल जाल. खाली हाथ जाए के बा पर गठरी ठूस रहल बानी, झूठा शान खातिर अपनन के...
Read More– डा॰अशोक द्विवेदी कविता का बारे में साहित्य शास्त्र के आचार्य लोगन के कहनाम बा कि कविता शब्द-अर्थ के आपुसी तनाव, संगति आ सुघराई से भरल अभिव्यक्ति ह. कवि अपना संवेदना आ अनुभव के अपना कल्पना शक्ति से भाषा का जरिए कविता के...
Read MorePosted by Editor | Oct 30, 2012 | पुस्तक चर्चा, भाषा, सरोकार |
आ बिना हेजिटेशन आई कैन सिंसियरली से कि इस टाइप के प्रयास वेयर नीडेड फ्राम लांग लांग टाइम. अनफार्चुनेटली दि भोजपुरिया पीपुल अंडरस्टैंडे नहीं करते कि डेवलपमेंट आफ भोजपुरी उनके बियांड अप्रोच है. भोजपुरी का डेवलपमेंट चाहिएं त उसपर...
Read Moreकातिक महीना आ शरद पूर्णिमा के अगवानी में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के बलिया इकाई के, बेदुआ मुहल्ला के अमरनाथ सिंह एडवोकेट का मकान पर आयोजित, काव्य गोष्ठी में भोजपुरी के उत्कृष्ट सिरजनशीलता के झलक देखे के मिलल. शिवजी पाण्डेय...
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