Category: साहित्य

बिजली में तड़प केतना होला अनजान बदरिया का जानी!

देश के बड़ गीतकार गोपालदास नीरज लिखले बाड़े – “गीत अगर मर जायेंगे तो क्या यहाँ रह जायेगा एक सिसकता आसुओं का कारवां रह जायेगा ” गोपालगंज (बिहार) जिला के कटेया अंचल में जनमल राधा मोहन चौबे ‘अंजन’ जी...

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बतकुच्चन ‍ – ९१

हेलल-हेलल भईंसिया पानी में. पिछला हफ्ता गुजरात के चुनाव के पोस्टपोल सर्वे क बाद मन में ई पुरान गाना गूंज उठल. बाकिर चुनाव-चरचा छोड़ हम सोचे लगनी कुछ अउर. हेलल आ घुसल में कुछ फरक होला कि ना, आ होला त का? अगर गीतकार घुसल-घुसल...

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बतकुच्चन ‍ – ८९

बबुनी ससुरा ना जाली मने मने गाजेली. भोजपुरी के ई कहाउत आजु कुछ राजनीतिक गोलो पर सही बइठत लागत बा. देश के बड़का पंचायत में दू गो गोल विदेशी किराना बाजार के विरोध कइला का बावजूद ओकरा के आवे से रोके के मौका पर भाग परइले. बहाना बना...

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बतकुच्चन ‍ – ८८

जब कवनो नेता के अपना पार्टी में रहत असकस लागे लागेला त ऊ अइसन अइसन बयानबाजी शुरू कर देला जवना से पार्टी नेतृत्व के अनकस होखे लागे आ ऊ आपन अहजह आ असकत छोड़त ओह नेता के पार्टी से निकाले के फैसला कर लेव आ ओकरा के उभचुभ से बचा लेव....

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पाप के कमाई

– ओम जी ‘प्रकाश’ रंडी, पतुरिआ का उपर फूंकाई! चोरी क पइसा त चोरी में जाई!! तिकड़म भिड़ा लिहलऽ, धन त कमा लिहलऽ मड़ई का जगहा तूँ कोठी उठा लिहलऽ नोकर आ चाकर से गाड़ी आ मोटर से दुअरा प मेला बा चमचन के रेला बा बाकिर ना...

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