श्रेणी: साहित्य

सुकुलजी..रउआँ बहुते बेजोड़ बानी जी

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” आजु हमरा सुकुलजी के बहुते इयादि आवता. जब हमरा खूब हँसे के मन करेला त हम सुकुलजी के इयादि क लेनी. सुकुलजी के एइसन-ओइसन मति समझीं सभे. सुकुलजी त बहुते काम के चीज हईं. सुकुलजी त ओमे के हईं की...

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बतकुच्चन ‍ – ७४

भोजपुरी में मन के भाव बतावे वाला शब्द अतना आ अइसन अइसन बाड़ी सँ जवना के दोसरा भाषा में अनुवाद करे में पसीना सूख जाई. पिछला दिने कुछ अइसने शब्द दिमाग में चमके लागल जब देश के सबले बड़की बईठका में एगो नेताइन, कहे के मतलब कि महिला...

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बतकुच्चन ‍ – ७३

गोल के बात का निकलल पिछला बेर कि माथा गोल हो गइल. मन में तरह तरह के सोच आपन आपन गोलबन्दी करे लागल. एह में गोलियात तीन गो शब्द सामने आइल गोल, गोला आ गोली. गोल कवनो समूह के कहल जाला. ई गोल खिलाड़ियन के होखे, होरिहारन के होखे, कवनो...

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फगुआ के पहरा: डा॰ विमल के काव्य संग्रह

डा॰ रामरक्षा मिश्र विमल के हालही में प्रकाशित काव्य संग्रह “फगुआ के पहरा” में २७ गो गीत, २२ गो गजल आ ६ गो कविता बाड़ी सँ. डा॰ विमल हिन्दी आ भोजपुरी के साहित्यकार हईं आ मूल रूप से गीतकार हईं. अँजोरिया के सौभाग्य बा कि...

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बतकुच्चन – ७०

लस्टम पस्टम में दिहल ज्योति जी के सवाल पर कुछ कहे से पहिले एक बात साफ कर दिहल जरूरी लागत बा. हम ना त भाषा शास्त्री हईं ना भाषा वैज्ञानिक. हम त बस नाच के लबार हईं, सर्कस के जोकर हईं, रमी के पपलू हईं. शब्दन से खिलवाड़ करत बतकुच्चन...

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