Category: साहित्य

नारायण… नारायण..

– ‍ नीमन सिंह एक बेर के बात ह, नारद मुनि कहीं से गुजरत रहनी. ओही रास्ता में उनुका एगो आदमी मिलल, उ आदमी कुछ जियादही भोला–भाला, माने कि कुछ–कुछ मुरख जइसन, सोझबउक रहे, अउर ओहपर से करईला आउर नीम चढ़ल वाली बात रहे कि उ तनी कम...

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भोजपुरी सरोकारन से जुड़ल पत्रिका भोजपुरी पंचायत

आजु जब भोजपुरी के पत्रिका प्रकाशन के स्थिति खराब चलत बा आ शायदे कवनो पत्रिका बिया जवना के नियमित प्रकाशन आ उहो समय पर हो रहल बा. एह दिसाईं दिल्ली से प्रकाशित होखे वाली पत्रिका भोजपुरी पंचायत बधाई के हकदार बिया कि अपना शुरुआत से...

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बतकुच्चन ‍ – ७५

बेर, बेरा, बारी आ बारी. बारी दू बेर आइल एकरो कारण बा. जवन आगा चल के बताएब. बेर मतलब कि आवृति, माने कि हाली. कव हाली भा कव बेर. कतना हाली भा कतना बेर. बाकिर बेर बेरा के बिगड़ल रूपो हो सकेला. बेरा मतलब समय. सबेरा, गदबेरा, एहबेरा,...

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सुकुलजी..रउआँ बहुते बेजोड़ बानी जी

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” आजु हमरा सुकुलजी के बहुते इयादि आवता. जब हमरा खूब हँसे के मन करेला त हम सुकुलजी के इयादि क लेनी. सुकुलजी के एइसन-ओइसन मति समझीं सभे. सुकुलजी त बहुते काम के चीज हईं. सुकुलजी त ओमे के हईं की...

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बतकुच्चन ‍ – ७४

भोजपुरी में मन के भाव बतावे वाला शब्द अतना आ अइसन अइसन बाड़ी सँ जवना के दोसरा भाषा में अनुवाद करे में पसीना सूख जाई. पिछला दिने कुछ अइसने शब्द दिमाग में चमके लागल जब देश के सबले बड़की बईठका में एगो नेताइन, कहे के मतलब कि महिला...

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